नई दिल्ली: अंकिता भंडारी हत्याकांड मामला एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों और सुर्खियों के केंद्र में आ गया है। दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के विरोध में अंकिता भंडारी के माता-पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना शुरू कर दिया है। इस विरोध प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा ने इंडिया गेट पहुंचकर अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की और उन्हें न्याय की इस लड़ाई में पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया। इससे पहले भी राहुल गांधी ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया था।
क्या है पूरा मामला और दुष्यंत गौतम से इसका कनेक्शन?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 22 दिसंबर 2025 को पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पत्नी और अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो जारी किया। इस वीडियो में उन्होंने दावा किया कि उनके पास उस ‘VIP’ के बारे में जानकारी है जिसका नाम 2022 के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ा जाता रहा है। उन्होंने सुरेश राठौर के साथ हुई बातचीत की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी साझा की, जिसमें ‘गट्टू’ नाम का जिक्र था। सार्वजनिक चर्चाओं में इस नाम को भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम से जोड़कर प्रचारित किया जाने लगा।
हालांकि, 23 दिसंबर को सुरेश राठौर ने सामने आकर इस वायरल ऑडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया फर्जी ऑडियो करार दिया और इसकी प्रामाणिकता पर सवाल खड़े किए। इसके बाद दुष्यंत गौतम ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए 5 जनवरी 2026 को देहरादून के डालनवाला थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही, 7 जनवरी को उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में मानहानि का एक दीवानी मुकदमा दायर किया, जिसमें उर्मिला सनावर, सुरेश राठौर, कुछ कांग्रेस पदाधिकारियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को प्रतिवादी बनाया गया।
मामلات की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रथम दृष्टया मानहानि का मामला मानते हुए संबंधित पक्षों को दुष्यंत गौतम को अंकिता मामले का ‘VIP’ बताने या ऐसा संकेत देने वाली सामग्री प्रसारित करने से रोक दिया तथा ऐसी सामग्री को हटाने के निर्देश दिए। वहीं, बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हत्याकांड की सीबीआई (CBI) जांच की सिफारिश की, जिसके बाद फरवरी की शुरुआत में सीबीआई ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर उत्तराखंड पुलिस की एसआईटी से दस्तावेज लेकर जांच शुरू की। हालांकि, जांच में अपेक्षित प्रगति न होने के कारण उत्तराखंड में लगातार विरोध प्रदर्शन होते रहे।
कौन हैं दुष्यंत गौतम?
दुष्यंत कुमार गौतम भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता हैं, जिनका जन्म 29 दिसंबर 1957 को दिल्ली के मलकागंज में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (बी.ए.) की शिक्षा प्राप्त की और अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत स्थानीय स्तर से की। वह 1997 से 2002 तक वसंत विहार वार्ड से नगर निगम पार्षद रहे और बाद में कोंडली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़े। वह भाजपा के राष्ट्रीय अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रमुख रहने के साथ-साथ सितंबर 2020 में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किए गए थे। मार्च 2020 में वह हरियाणा से राज्यसभा सांसद चुने गए और नवंबर 2020 से उन्हें उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसे जुलाई 2024 में दोबारा renouvel किया गया।
वर्तमान राजनीतिक हलचल और राहुल गांधी का बयान
राष्ट्रपति भवन द्वारा 12 अक्टूबर 2026 को दुष्यंत गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने की घोषणा के बाद उत्तराखंड कांग्रेस ने इस नियुक्ति के खिलाफ उपवास और विरोध का ऐलान किया। इसी कड़ी में अंकिता भंडारी के माता-पिता (पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और माता सोनी देवी) ने न्याय की गुहार लगाते हुए इंडिया गेट पर धरना दिया।
घटनास्थल पर पहुंचे राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा कि चार साल बीत जाने के बाद भी अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय नहीं मिला है, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति को संवैधानिक पद से नवाजा गया है जिस पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में इस तरह के कदम जनता को निराश करते हैं। कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह अंकिता के परिवार के साथ इस लंबी कानूनी और सामाजिक लड़ाई में पूरी मजबूती से खड़ी है।
उत्तराखंड सरकार का पक्ष
इस पूरे घटनाक्रम और बढ़ते विवाद के बीच उत्तराखंड सरकार ने एक बार फिर अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई किए जाने का दावा किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, घटना सामने आने के मात्र 24 घंटे के भीतर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था और विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। सरकार का कहना है कि मामले की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वूप न्यायालय ने इस जघन्य अपराध में शामिल तीन मुख्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
