पणजी: भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार तड़के गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। शुरुआती रिपोर्ट्स और सूत्रों के मुताबिक, उन्हें दिल का दौरा पड़ने (हार्ट अटैक) की आशंका जताई जा रही है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, नाना पाटेकर पणजी के पास डोना पाउला स्थित अपने अपार्टमेंट में अचानक बेहोश पाए गए थे, जिसके बाद उन्हें तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शेखर सालकर ने उनके निधन की पुष्टि की।
रंगमंच से पद्म श्री तक का सफर
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले (मुरुड जंजीरा) में जन्मे विश्वनाथ ‘नाना’ पाटेकर ने मुंबई के Sir J.J. Institute of Applied Art से शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने करियर की शुरुआत थिएटर (रंगमंच) से की थी। उन्होंने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से बड़े पर्दे पर कदम रखा। अपनी कड़क आवाज, अनूठी संवाद अदायगी और संजीदा अभिनय के दम पर उन्होंने बॉलीवुड में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान बनाई।
अपने चार दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘अंगार’, ‘सलाम बॉम्बे!’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ जैसी कालजयी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ फिल्म का सफल निर्देशन भी किया था। उत्कृष्ट अभिनय के लिए उन्हें 3 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, 4 फिल्मफेयर पुरस्कार और वर्ष 2013 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से नवाजा गया था।
‘नाम फाउंडेशन’ और सामाजिक योगदान
नाना पाटेकर न केवल एक महान कलाकार थे, बल्कि एक समर्पित समाजसेवक भी थे। महाराष्ट्र में सूखे और किसानों की आत्महत्या के गंभीर संकट को देखते हुए उन्होंने साल 2015 में अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर ‘नाम फाउंडेशन’ (NAAM Foundation) की स्थापना की। इस संस्था ने पीड़ित किसान परिवारों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ जल संरक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया।
उन्होंने राज कपूर अवॉर्ड की 10 लाख रुपये की पूरी पुरस्कार राशि सूखा राहत में दान कर दी थी तथा ‘अनुभूति’ संस्था के माध्यम से बिहार के बाढ़ प्रभावित गांवों के पुनर्निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभाई थी।
विवादों से सामना
उनका करियर विवादों से भी घिरा रहा। साल 2018 में भारत में चले #MeToo आंदोलन के दौरान अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने 2008 की फिल्म ‘हॉर्न ओके प्लीज’ के सेट पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। हालांकि, नाना पाटेकर ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया था। मुंबई पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी और साल 2025 में अदालत ने भी इस केस को खारिज कर दिया था।
नाना पाटेकर के जाने से भारतीय फिल्म जगत और सामाजिक क्षेत्र में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे भरना असंभव है। वह अपने पीछे अभिनय, निर्भीकता और जनकल्याण की एक महान विरासत छोड़ गए हैं।
