हिंदू धर्म में जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत का विशेष और गहरा महत्व माना जाता है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी जीवन की मंगल कामना से रखती हैं। बिहार, झारखंड और उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इस पर्व को अत्यंत श्रद्धा और कठिन नियमों के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माताएं पूरे समय निर्जला उपवास रखती हैं और भगवान जीमूतवाहन की विधिवत पूजा-अर्चना करती हैं।
जितिया व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त
आचार्य मदन मोहन के अनुसार, वर्ष 2026 में जितिया का निर्जला उपवास 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। इस बार अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को शुरू होकर 4 अक्टूबर की सुबह तक रहेगी। व्रत से जुड़ी नहाय-खाय और ओठगन की परंपराएं 2 अक्टूबर की रात को संपन्न की जाएंगी। 3 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:34 बजे के बीच व्रत का संकल्प लेना शुभ माना गया है।
जितिया व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल में करने का विधान है। इस दिन शाम 6:05 बजे से रात 8:29 बजे तक का समय पूजा के लिए अत्यंत उपयुक्त रहेगा। इसी शुभ समय के दौरान जीमूतवाहन की पूजा, व्रत कथा का पाठ और आरती संपन्न की जाएगी।
भगवान श्री कृष्ण और महाभारत से जुड़ी पौराणिक कथा
इस पावन व्रत की कथा महाभारत काल से जुड़ी मानी जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के अंत में अश्वत्थामा ने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को नष्ट करने के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया था। तब भगवान श्री कृष्ण ने अपनी दिव्य शक्तियों से गर्भ में पल रहे उस अजन्मे बालक की रक्षा कर उसे नया जीवन प्रदान किया। कृष्ण द्वारा जीवनदान पाने के कारण ही उस बालक को जीवितपुत्रिका कहा गया, और तभी से माताओं द्वारा संतान की लंबी आयु और सुरक्षा के लिए इस कठिन निर्जला व्रत को रखने की परंपरा की शुरुआत हुई।
पारण का समय और सावधानी
व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026, रविवार की सुबह अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद नवमी तिथि में किया जाएगा। आचार्य के अनुसार पारण का सही समय सुबह 7:27 बजे के बाद रहेगा। स्थानीय पंचांग और सूर्योदय के समय में थोड़ा-बहुत अंतर हो सकता है, इसलिए व्रत धारण करने वाली महिलाएं अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण का समय मिला सकती हैं।
