पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में बहुत बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला है। चुनाव आयोग ने एक अंतरिम आदेश जारी कर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘घास पर दो फूल’ के उपयोग पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसके बाद अब ममता बनर्जी और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों गुटों को उपचुनाव में नए नाम और नए चुनाव चिह्न के साथ उतरना होगा।
चुनाव आयोग ने अपने 14 पन्नों के अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया है कि आयोग के पास उपलब्ध सभी दस्तावेजों और तथ्यों के अवलोकन के बाद यह साफ है कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस में दो प्रतिद्वंद्वी गुट बन चुके हैं। इनमें से एक गुट का नेतृत्व पार्टी की संस्थापक ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि दूसरे गुट का प्रतिनिधित्व अरूप रॉय और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। चूंकि दोनों ही पक्ष खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं, इसलिए इलेक्शन सिंबल्स ऑर्डर 1968 के पैरा 15 के तहत इस मामले में विस्तार से सुनवाई और अंतिम फैसला करने की कानूनी आवश्यकता है। आयोग का मानना है कि उपचुनाव से पहले विस्तृत सुनवाई पूरी करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं है, इसलिए दोनों गुटों के अधिकारों की रक्षा के लिए अंतरिम तौर पर पार्टी नाम और सिंबल को फ्रीज करने का कदम उठाया गया है।
चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को निर्देश दिया है कि वे शुक्रवार सुबह 11 बजे तक आयोग के समक्ष तीन-तीन नए नाम और आयोग की फ्री सिंबल लिस्ट से तीन-तीन चुनाव चिह्नों के विकल्प जमा कराएं। दोनों गुट चाहें तो अपने नए नाम में मूल पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के संदर्भ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके बाद आयोग दोनों पक्षों को उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और सिंबल आवंटित करेगा।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग के इस अंतरिम आदेश पर कड़ा ऐतराज जताया है। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी इस आदेश से बिल्कुल सहमत नहीं है क्योंकि इसमें कई कानूनी कमियां हैं और तथ्यों को सही तरीके से पेश नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी ऐसी परिस्थितियों को अस्थायी तौर पर स्वीकार करना पड़ता है, लेकिन वे इसका कानूनी और राजनीतिक जवाब देंगे। वहीं दूसरी तरफ, सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी ने कड़े विरोध के साथ अपने तीन पसंदीदा नए नाम और चुनाव चिह्नों के विकल्प आयोग को भेज दिए हैं।
दूसरी ओर, बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने चुनाव आयोग के इस अंतरिम निर्णय का स्वागत किया है। बागी गुट के नेता और टीएमसी विधायक अखरुज्जमां अंसारी ने कहा कि वे चुनाव आयोग की इस अंतरिम व्यवस्था का पूरी तरह पालन करेंगे। बागी गुट को पूरा भरोसा है कि जब चुनाव आयोग साक्ष्यों के आधार पर अंतिम फैसला सुनाएगा, तो उन्हें ही असली तृणमूल कांग्रेस के नाम और सिंबल का अधिकार प्राप्त होगा।
उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी ने 1998 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। पिछले 25 वर्षों से पार्टी ‘घास पर दो फूल’ के निशान के साथ चुनाव लड़ती आ रही है और करीब 15 वर्षों तक पश्चिम बंगाल की सत्ता में रही है। मई में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद टीएमसी में अंदरूनी कलह तेज हो गई थी। इसके बाद 3 जून को तृणमूल कांग्रेस के 80 में से 60 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी और ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुनकर अरूप रॉय को पार्टी का नया अध्यक्ष घोषित कर दिया था, जिसके बाद यह विवाद चुनाव आयोग तक पहुँचा।
