BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग का संभावित भारत दौरा, 7 साल बाद भारतीय सरजमीं पर पीएम मोदी से द्विपक्षीय वार्ता

BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग का संभावित भारत दौरा
BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग का संभावित भारत दौरा

18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना है। बीजिंग स्थित चीन के विदेश मंत्रालय (MFA) की ओर से उनके भारत दौरे का आधिकारिक ऐलान किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। तय कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार दोपहर नई दिल्ली पहुंच सकते हैं। इसके पश्चात, शनिवार शाम करीब छह बजे दिल्ली स्थित ‘भारत मंडपम’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी उच्च स्तरीय मुलाकात हो सकती है।

ब्रिक्स सम्मेलन के इतर भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली यह द्विपक्षीय बैठक रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के संबंधों के इतिहास में यह क्षण इसलिए खास है क्योंकि भारतीय जमीन पर पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच लगभग 7 साल बाद कोई द्विपक्षीय मुलाकात होगी। वर्ष 2020 में हुई गलवान घाटी की झड़पों और सीमा पर जारी तनाव के बाद यह पहला मौका होगा जब दोनों शीर्ष नेता भारत में आमने-सामने बैठकर वार्ता करेंगे।

उल्लेखनीय है कि भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 12 तथा 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष सम्मेलन की थीम ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ रखी गई है। वर्ष 2026 में ब्रिक्स की स्थापना के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दो दिवसीय इस सम्मेलन में सदस्य और साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्ष वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय और पारस्परिक संबंधों को मजबूत करने पर मंथन करेंगे।

इससे पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आखिरी बार 11-12 अक्टूबर 2019 को भारत आए थे। उस समय वह तमिलनाडु के ममल्लापुरम (महाबलीपुरम) में आयोजित दूसरे भारत-चीन अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे, जो 2018 के वुहान सम्मेलन की तर्ज पर आयोजित किया गया था। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय बाद भारतीय सरजमीं पर होने वाली इस द्विपक्षीय वार्ता से दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने और सीमा संबंधी तनाव को कम करने में बड़ी सहायता मिल सकती है।

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