बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के 13 जिलों में करीब 29.13 लाख लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। इस बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विशेष राहत की मांग की है।
बताया गया है कि बाढ़ का असर 13 जिलों के 77 प्रखंडों और 438 ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुका है। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। प्रभावित आबादी इतनी अधिक होने के चलते अब राज्य सरकार के राहत प्रयासों के साथ-साथ केंद्र से अतिरिक्त सहायता की मांग भी तेज हो गई है।
बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग
तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में बिहार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि इतनी बड़ी आबादी के प्रभावित होने के बाद राज्य को केंद्र की ओर से विशेष सहायता मिलना जरूरी है।
उन्होंने बिहार के लिए 5,000 करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक पैकेज की मांग भी रखी है। तेजस्वी के मुताबिक, इस राशि का इस्तेमाल बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत देने और संकट से निपटने के लिए किया जा सकता है।
फंसे लोगों तक एयरफोर्स से पहुंचाई जाए राहत
बाढ़ के कारण कई ऐसे इलाके भी हैं जहां सामान्य माध्यमों से राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। इसे देखते हुए तेजस्वी यादव ने भारतीय वायुसेना की मदद लेने और जरूरत वाले इलाकों में एयर ड्रॉपिंग के जरिए भोजन तथा अन्य जरूरी सामान पहुंचाने की मांग की है।
उनका कहना है कि जिन लोगों तक सड़क या अन्य साधनों से राहत नहीं पहुंच पा रही है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए तत्काल सहायता पहुंचाई जानी चाहिए।
किसानों और मजदूरों के लिए भी अलग पैकेज की मांग
बाढ़ का असर सिर्फ घरों और सामान्य जनजीवन तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में किसानों और मजदूरों के सामने भी आर्थिक संकट खड़ा होने की बात कही जा रही है। तेजस्वी यादव ने केंद्र से बाढ़ प्रभावित किसानों और मजदूरों के लिए अलग राहत पैकेज देने की मांग की है, ताकि फसल और रोजगार के नुकसान के बाद उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके।
इसके साथ ही उन्होंने बिहार की वित्तीय स्थिति की CAG से जांच कराने की मांग भी की है। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कुल सात मांगें रखी हैं।
कॉन्टिजेंसी फंड को लेकर बिहार सरकार पर आरोप
तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ आने से ठीक पहले जून में राज्य सरकार ने कॉन्टिजेंसी फंड से करीब 4,000 करोड़ रुपये निकाले थे। उनके मुताबिक, इस राशि का इस्तेमाल पेंशन जैसी नियमित योजनाओं के भुगतान में भी किया गया।
तेजस्वी ने दावा किया कि अब राज्य में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच वित्तीय संसाधनों की कमी का असर राहत व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्टिजेंसी फंड से पहले निकाली गई रकम का खामियाजा बाढ़ प्रभावित लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
13 जिलों में 29.13 लाख लोग प्रभावित
बिहार में बाढ़ से प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल शामिल हैं। इन जिलों के 77 प्रखंडों और 438 ग्राम पंचायतों में लगभग 29.13 लाख लोगों के प्रभावित होने की जानकारी दी गई है।
ऐसे में तेजस्वी यादव का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र बाढ़ राहत के साथ-साथ राज्य की राजनीति में भी महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने केंद्र से तत्काल आर्थिक सहायता, प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने के लिए अतिरिक्त संसाधन और किसानों-मजदूरों के लिए विशेष पैकेज की मांग की है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार बिहार की इन मांगों पर क्या कदम उठाती है।
