काठमांडू: नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से मची भीषण तबाही को लेकर देश के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) को संबोधित करते हुए इसे जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का प्रत्यक्ष परिणाम बताया है। संसद में स्थिति की विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इस आपदा ने साबित कर दिया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जलवायु परिवर्तन के कारण कितना बड़ा खतरा उठाना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री शाह ने जोर देकर कहा कि इस वैश्विक समस्या के पीछे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का योगदान है, इसलिए इसके प्रभावों को नियंत्रित करने और क्षति को कम करने की नैतिक जिम्मेदारी भी ग्लोबल कम्युनिटी को ही उठानी होगी।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानें खिसकने तथा हिमस्खलन (एवलांच) के कारण 26 अगस्त को आई यह अचानक बाढ़ रसुवा के रास्ते उत्तरी और मध्य नेपाल के विभिन्न हिस्सों में फैल गई थी। इस भीषण जलप्रलय में रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,100 से अधिक हो चुकी है, जबकि 4,800 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। संकट के इस दौर पर पीएम शाह ने कहा कि देश के नेतृत्व को ऐसे समय में जनता को हिम्मत, सहारा और भरोसा देना चाहिए, न कि आंसू बहाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश इस आपदा से पूरे पक्के इरादे और साहस के साथ लड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय सहायता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने उन मीडिया खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि नेपाल ने विदेशी मदद लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार ने शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ समन्वय बनाकर मदद मांगी है। अब तक भारत, चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कतर, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन, जापान और सिंगापुर जैसे मित्र देशों ने नेपाल को राहत सामग्री और वित्तीय मदद मुहैया कराई है। इसके अलावा एशियाई विकास बैंक (ADB), विश्व बैंक, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी सहायता का वादा किया है।
प्रधानमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों और जलविद्युत स्थलों पर फंसे लोगों को निकालने के लिए भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। प्रभावित इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों की भारी तैनाती की गई है और स्थानीय प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है। वहीं, राहत कार्यों को गति देने के लिए बनाए गए ‘प्रधानमंत्री राहत कोष’ में बुधवार दोपहर तक 7 बिलियन (7 अरब) से अधिक नेपाली रुपये जमा हो चुके हैं।
