नेपाल बाढ़ में तबाही के बीच मिला बैंक का खजाना, 50 करोड़ का सोना और 1.5 करोड़ कैश मलबे से बरामद

Nepal Flood: नेपाल में खराब मौसम और बाढ़ के बीच राहत-बचाव अभियान तेज है। अब तक 9,435 लोगों को सुरक्षित निकाला गया और 20,618 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश जारी है, जबकि भारत समेत कई देश राहत में सहयोग कर रहे हैं।

नेपाल बाढ़: मलबे से मिला 50 करोड़ का सोना और 1.5 करोड़ रुपये नकद
नेपाल बाढ़: मलबे से मिला 50 करोड़ का सोना और 1.5 करोड़ रुपये नकद

Nepal Flood: नेपाल में पिछले पांच दिनों से खराब मौसम और प्राकृतिक आपदा के कारण कई इलाकों में हालात गंभीर बने हुए हैं। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने राहत और बचाव अभियान की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि रसुवा में भोटेकोशी नदी की बाढ़ से हुई तबाही का पूरा आकलन अभी संभव नहीं हो पाया है। कई इलाकों में मौसम खराब है और भौगोलिक परिस्थितियां भी बचाव दलों के लिए मुश्किल पैदा कर रही हैं। इसके बावजूद सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया है।

प्रधानमंत्री के मुताबिक अब तक 9,435 लोगों को हवाई और सड़क मार्ग के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। राहत एवं बचाव अभियान के लिए अब तक 394 उड़ानें संचालित हुई हैं। इनमें रविवार को की गई 72 उड़ानें भी शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के कुल 20,618 जवानों को तैनात किया गया है।

जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे लोगों को निकालने का अभियान जारी

बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं के आसपास भी बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। नेपाली सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से अब तक 279 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। रसुवा स्थित अपर त्रिशूली-1 परियोजना के आसपास भारतीय विशेषज्ञों की टीम ने भी अभियान में हिस्सा लिया है। दो दिनों के दौरान करीब 250 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाले जाने की जानकारी दी गई है।

नेपाल के इस अभियान में भारत के साथ चीन और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं। भारतीय विशेषज्ञों की टीम रसुवा में एक सुरंग के भीतर करीब तीन किलोमीटर तक तलाशी अभियान चला रही है, ताकि वहां फंसे लोगों का पता लगाया जा सके।

नुवाकोट की सुरंग में भारी मशीनों और ब्लास्टिंग से रास्ता खोलने की कोशिश

नुवाकोट की अपर त्रिशूली-3 ‘ए’ जलविद्युत परियोजना की सुरंग में भी बचाव कार्य लगातार जारी है। नेपाली सेना के इंजीनियर सुरंग के अंदर पहुंचने के लिए ब्लास्टिंग की मदद से रास्ता तैयार कर रहे हैं। मौके पर सेना, सशस्त्र पुलिस के प्रशिक्षित खोजी कुत्तों और नेपाल पुलिस के विशेषज्ञों समेत करीब 90 लोगों की टीम काम कर रही है।

सुरंग में करीब दो बाई तीन फीट का रास्ता बनाया गया था, लेकिन वहां से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद बचाव अभियान का दायरा बढ़ाया गया। अब बड़े उपकरणों के इस्तेमाल के साथ ब्लास्टिंग और सुरंग को चौड़ा करने का काम भी किया जा रहा है। अपर त्रिशूली-3 ‘बी’, चिलिमे, लांगटांग खोला और मैलुंग खोला परियोजनाओं में भी राहत एवं खोज अभियान चल रहा है। इन अभियानों में भारतीय विशेषज्ञ नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

267 घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया

आपदा प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 267 घायलों को निकालकर स्थानीय अस्पतालों और काठमांडू के चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है। इनमें से 156 लोगों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। प्रभावित लोगों की चिकित्सा जरूरतों को देखते हुए काठमांडू से डॉक्टरों की टीमें भी भेजी गई हैं। प्रशासन की ओर से मानसिक स्वास्थ्य और मनोपरामर्श की सुविधा उपलब्ध कराने की भी कोशिश की जा रही है।

राहत कोष में 5.24 अरब नेपाली रुपये जमा

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बताया कि आपदा प्रभावित लोगों की मदद के लिए प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप कोष और प्रधानमंत्री राहत कोष के माध्यम से आर्थिक संसाधन जुटाए जा रहे हैं। रविवार दोपहर तक नौ वाणिज्यिक बैंकों के खातों में 5 अरब 24 करोड़ 79 लाख 44 हजार 585 नेपाली रुपये जमा हो चुके थे। इसके अलावा हिमालयन बैंक और लक्ष्मी बैंक में 21 लाख 232 अमेरिकी डॉलर की राशि भी जमा होने की जानकारी दी गई है।

26 राहत केंद्रों में लोगों को मिल रही मदद

रसुवा और नुवाकोट में 26 अस्थायी राहत एवं आश्रय केंद्र बनाए गए हैं। रविवार को इन केंद्रों के जरिए 3,454 लोगों को रहने की जगह और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई। सरकार के मुताबिक प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने का काम लगातार जारी है।

नेपाल को पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भी सहायता मिल रही है। भारत की ओर से अब तक चार चरणों में 68.5 टन मानवीय सहायता और आवश्यक दवाएं भेजी जा चुकी हैं। इसके अलावा भारत ने 230 फीट लंबा सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज भी उपलब्ध कराया है। सात और बेली ब्रिज देने की प्रतिबद्धता जताई गई है, जबकि नेपाल ने कुल 30 बेली ब्रिज की मांग रखी है।

कई देशों ने आर्थिक सहायता का किया ऐलान

आपदा से निपटने के लिए नेपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद मिल रही है। एशियाई विकास बैंक ने 50 लाख डॉलर के बजटीय अनुदान के साथ 1.5 लाख डॉलर की तकनीकी सहायता देने का आश्वासन दिया है। विश्व बैंक ने 16.7 करोड़ डॉलर के रियायती ऋण की पेशकश की है। अमेरिका से 5 लाख डॉलर और ऑस्ट्रेलिया से 10 लाख डॉलर की सहायता का आश्वासन मिला है। वहीं स्विट्जरलैंड ने संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से इस्तेमाल के लिए 10 लाख स्विस फ्रैंक की मदद दी है।

बाढ़ के बाद संचार व्यवस्था सुधारने की कोशिश

आपदा के दौरान नेपाल में मोबाइल और दूरसंचार सेवाओं को भी नुकसान पहुंचा। नेपाल टेलिकॉम के 38 और एनसेल के 27 टावर प्रभावित हुए थे। इनमें से अब तक नेपाल टेलिकॉम के 106 और एनसेल के 75 टावर दोबारा चालू किए जा चुके हैं। दुर्गम और प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बनाए रखने के लिए 20 सैटेलाइट फोन भी भेजे गए हैं।

प्रधानमंत्री बालेन शाह का कहना है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद सरकार की प्राथमिकता लोगों की जान बचाना, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और जरूरी सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करना है। सुरंगों और जलविद्युत परियोजनाओं में जारी खोज अभियान के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास की प्रक्रिया पर भी काम किया जा रहा है।

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