देश के कई हिस्सों में जारी आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस पार्टी ने जाति जनगणना (Caste Census) का मुद्दा नए सिरे से उठा दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सही और पारदर्शी तरीके से जाति जनगणना नहीं कराना चाहती और मौजूदा तरीका सामाजिक न्याय के खिलाफ है।
कांग्रेस का यह हमला ऐसे समय आया है जब आगामी जनगणना के फॉर्म में केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का कॉलम रखा गया है, जबकि अन्य जातियों (OBC/General) के लिए अलग कॉलम नहीं दिया गया है।
जयराम रमेश ने सरकार के रुख को “धोखा और विश्वासघात” बताते हुए कहा कि यदि सरकार ईमानदारी से सामाजिक न्याय में विश्वास रखती है, तो उसे वर्तमान प्रक्रिया को तुरंत रद्द करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बिहार और तेलंगाना में जिस तरह व्यापक और वैज्ञानिक स्तर पर जातीय सर्वेक्षण कराया गया था, उसी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार को इस विषय पर विशेषज्ञों से चर्चा करनी चाहिए और तुरंत एक सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलानी चाहिए।
जयराम रमेश ने जोर देकर कहा कि आरक्षण का सीधा संबंध जनसंख्या से है, और यदि जाति जनगणना सही तरीके से नहीं हुई तो आरक्षण की व्यवस्था को मजबूती नहीं दी जा सकती।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्रों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 20 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को जातिगत जनगणना के संबंध में 21 पन्नों का विस्तृत पत्र भेजा है। यह इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी की ओर से लिखा गया तीसरा पत्र है। इससे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने 16 अप्रैल 2023 को पहला और 5 मई 2025 को रचनात्मक सुझावों के साथ दूसरा पत्र लिखा था, लेकिन सरकार की ओर से इनका कोई जवाब नहीं मिला।
कांग्रेस का तर्क है कि जनगणना में जातियों की जानकारी दर्ज करने के लिए सरकार द्वारा ‘ओपन-एंडेड’ (Open-ended) प्रश्नों का तरीका चुना गया है, जो भ्रामक है और जिससे सटीक आंकड़े हासिल नहीं हो सकेंगे। पार्टी का कहना है कि सही आंकड़ों के बिना देश में सामाजिक न्याय की नीतियां अधूरी रहेंगी।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब दिल्ली, जयपुर, लखनऊ और पटना जैसे प्रमुख शहरों में पिछले कुछ दिनों से आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, जिस पर कई दलित और सामाजिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। इन परिस्थितियों के बीच कांग्रेस ने जाति जनगणना के मुद्दे को और अधिक आक्रामक तरीके से उठाने का संकेत दिया है।
