प्याज की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा कदम, आज से चलेगी ‘कांदा एक्सप्रेस’; दिल्ली समेत इन शहरों को राहत

प्याज की लगातार बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए केंद्र सरकार ने बाजार में अपने बफर स्टॉक की आपूर्ति बढ़ाने का फैसला किया है। शनिवार को प्याज का औसत खुदरा भाव 42 रुपये प्रति किलो पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 45 फीसदी और पिछले महीने के मुकाबले 19 फीसदी ज्यादा है।

प्याज की कीमतों पर लगेगी लगाम, नासिक से आज चलेगी 'कांदा एक्सप्रेस'
प्याज की कीमतों पर लगेगी लगाम, नासिक से आज चलेगी 'कांदा एक्सप्रेस'

देश भर में चीनी के बाद अब रसोई के सबसे अहम घटक यानी प्याज की खुदरा कीमतों में दर्ज की जा रही बेतहाशा बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग ने प्याज की बढ़ती दरों पर लगाम लगाने के लिए अपने बफर स्टॉक को सीधे खुदरा बाजारों में उतारने का निर्णय लिया है। इसके तहत सरकार सोमवार (24 अगस्त) से नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे प्रमुख शहरों के लिए विशेष रेलगाड़ी ‘कांदा एक्सप्रेस’ संचालित करने जा रही है। इन लक्षित शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक पाई गई हैं, जिसके चलते यह आपातकालीन आपूर्ति शुरू की जा रही है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को देश भर में प्याज की औसत खुदरा कीमत उछलकर 42 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई थी, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 45 प्रतिशत और पिछले महीने के मुकाबले 19 प्रतिशत अधिक है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि राजधानी दिल्ली में प्याज की खुदरा दरें 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी हैं, जबकि पिछले साल इसी समय यह 35 रुपये प्रति किलो बिक रही थी। इसी तरह चेन्नई में प्याज 58 रुपये प्रति किलो (पिछले वर्ष 33 रुपये) बिक रहा है, जबकि असम और केरल के कई हिस्सों में भी कीमतें राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक बनी हुई हैं।

प्याज के साथ-साथ चीनी के दामों में भी तेजी का रुख जारी है। शनिवार को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 62.5 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई, जो एक महीने पहले 46 रुपये प्रति किलो थी। दिल्ली में चीनी की कीमतें 65 रुपये और मुंबई में 69 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि कीमतों में इस हालिया उछाल के पीछे कुछ व्यापारियों द्वारा की जा रही सट्टेबाजी और कृत्रिम जमाखोरी भी एक वजह हो सकती है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आगामी महीनों में मांग को पूरा करने के लिए सरकार और किसानों दोनों के पास प्याज और चीनी का पर्याप्त सरप्लस स्टॉक मौजूद है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र में खरीफ सीजन के दौरान प्याज के उत्पादन में अनुमानित 5% से 7% की गिरावट की खबरों के कारण बाजार में पैनिक बाइंग और कीमतों में तेजी देखी जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सस्ते दामों पर प्याज उपलब्ध कराने के लिए सीधा हस्तक्षेप किया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अक्टूबर 2024 में नासिक से दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों के लिए सफलतापूर्वक ‘कांदा एक्सप्रेस’ चलाई थी। सरकार के इस कदम से आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को प्याज की बढ़ती कीमतों से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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