ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के सीमावर्ती शहर मिर्जावेह में एक प्रमुख सुन्नी मौलवी मोहम्मद अनवर रीगी की अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी है। मिर्जावेह के स्थानीय गवर्नर ने इस घटना की पुष्टि करते हुए इसे एक सोची-समझी आतंकी साजिश और कायराना हमला करार दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह वारदात उस समय हुई जब मौलवी मोहम्मद अनवर रीगी शहर की अली इब्न अबी तालिब मस्जिद के पास मौजूद थे। हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिससे गंभीर रूप से घायल होने के कारण उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
यह घटना ईरान के स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 4:00 बजे घटित हुई, जिसके चलते इस हत्याकांड को लेकर स्थानीय स्तर और सोशल मीडिया पर कई तरह की थ्योरीज और कयास लगाए जा रहे हैं। मौलवी मोहम्मद अनवर रीगी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के मिर्जावेह शहर में सुन्नी बलूच समुदाय के एक बेहद प्रभावशाली और प्रमुख धार्मिक नेता थे। वे वहां की प्रतिष्ठित मस्जिद अली इब्न अबी तालिब के ‘इमाम-ए-जुम्मा’ (शुक्रवार की नमाज के मुख्य इमाम) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे और लंबे समय से स्थानीय स्तर पर सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में काफी सक्रिय थे।
मौलवी अनवर रीगी की इस पद पर नियुक्ति को लेकर पहले से ही कुछ विवाद चल रहा था। दरअसल, उनसे पहले इस मस्जिद के इमाम रहे मौलवी अब्दुल कहार मीरबलोचजही को ईरानी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था, जिसके बाद स्थानीय बलूच समुदाय के कई लोगों ने प्रशासन के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन किया था। इस तनावपूर्ण पृष्ठभूमि के बीच मौलवी अनवर रीगी को नया इमाम नियुक्त किया गया था। गौर करने वाली बात यह भी है कि मौलवी रीगी पर हुआ यह पहला हमला नहीं था। इससे पहले दिसंबर 2024 में भी अज्ञात बंदूकधारियों ने उन्हें निशाना बनाते हुए उन पर जानलेवा गोलीबारी की थी, हालांकि उस समय वे बाल-बाल बचने में कामयाब रहे थे। फिलहाल, स्थानीय सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है और मामले की गहन जांच की जा रही है।
