US-Iran Conflict: वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहा सैन्य गतिरोध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। उत्तरी इराक में ईरान के एक ड्रोन हमले के बाद बचे हुए विस्फोटकों को नष्ट करने के दौरान एक और अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि यूएस सेंट्रल कमांड (US Central Command) ने की है। इस ताजा घटना के बाद, फरवरी के अंत से शुरू हुए इस भीषण सैन्य टकराव में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या बढ़कर 17 हो गई है। इस हादसे में एक अन्य जवान भी गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसका फिलहाल इलाज चल रहा है।
यूएस सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि यह हादसा 18 जुलाई को उत्तरी इराक में उस समय हुआ, जब अमेरिकी सेना के जवान ईरान द्वारा गिराए गए एक वन-वे-अटैक ड्रोन के बिना फटे मलबे और विस्फोटक को नियंत्रित तरीके से नष्ट (कंट्रोल्ड डेटोनेशन) कर रहे थे। इस सैन्य क्षति के बाद पूरे मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जिसके जवाब में अमेरिकी वायुसेना ने सोमवार तड़के ईरान के भीतर जवाबी हमलों का एक और आक्रामक दौर शुरू कर दिया। यह लगातार नौवीं रात है जब अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरानी स्थानीय मीडिया के अनुसार, तड़के करीब 2:30 बजे देश के कई हिस्सों में सिलसिलेवार और बेहद शक्तिशाली धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
सेंट्रल कमांड का कहना है कि इन लगातार किए जा रहे हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं और लॉन्च पैड्स को पूरी तरह से तहस-नहस करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसी रणनीतिक समुद्री सीमा से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल जहाजों और निर्दोष नागरिकों पर हमलों के लिए किया जाता है। इससे पहले, जॉर्डन में एक ईरानी हमले के दौरान दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी, जबकि एक सैनिक लापता चल रहा था। अमेरिकी सेना ने अपने बयान में यह भी साझा किया है कि उन्हें रविवार को एक अज्ञात शव के अवशेष मिले हैं, जिनकी पहचान के लिए फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
इस बार अमेरिका और ईरान के बीच का यह टकराव केवल सैन्य चौकियों तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि अमेरिका ने ईरान के भीतर महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचों जैसे प्रमुख पुलों, जल शोधन संयंत्रों (वॉटर प्लांट्स) और बिजली उत्पादन केंद्रों (पावर ग्रिड्स) को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। अमेरिका की इस रणनीतिक घेराबंदी के जवाब में, तेहरान ने भी मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं। ईरान के इन संभावित हवाई हमलों से निपटने और अपनी सुरक्षा के लिए कुवैत, जॉर्डन, बहरीन और कतर जैसे पड़ोसी देशों ने अपने-अपने अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर एक्टिवेट कर दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनी हुई है।
