दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर खुद को डिस्चार्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनका स्वास्थ्य अब सामान्य है और वह संसद तक होने वाले ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल होना चाहते हैं।
अस्पताल प्रशासन को लिखे पत्र में सोनम वांगचुक ने कहा कि वह अब काफी अच्छा महसूस कर रहे हैं और उनके स्वास्थ्य से जुड़े सभी पैरामीटर सामान्य हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि उन्हें कुछ समय के लिए अस्पताल से जाने की अनुमति दी जाए, ताकि वह संसद मार्च में हिस्सा ले सकें।
सोनम वांगचुक ने इस पत्र को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर भी साझा किया। इसके साथ उन्होंने लिखा कि वह लोगों से मिलने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उनका स्वास्थ्य ठीक है और अस्पताल का कहना है कि वह हिरासत में नहीं हैं, तो फिर उन पर पाबंदियां क्यों लगाई जा रही हैं।
Sonam Wangchuk is trying hard to see you all! Just submitted a letter to the hospital as his health is good and they claim he is not in detention. So why the restrictions? pic.twitter.com/XqeurZUtoP
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 20, 2026
इससे पहले सोमवार सुबह 10 बजे सफदरजंग अस्पताल ने हेल्थ बुलेटिन जारी किया। अस्पताल के अनुसार, वांगचुक को VMMC और सफदरजंग अस्पताल में व्यापक चिकित्सा देखभाल दी जा रही है। उनके सभी वाइटल पैरामीटर स्थिर हैं, हालांकि ब्लड पैरामीटर्स की लगातार निगरानी की आवश्यकता बनी हुई है। अस्पताल ने बताया कि वह विशेषज्ञों की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम की निगरानी में हैं।
अस्पताल के बुलेटिन में कहा गया कि VMMC एवं सफदरजंग अस्पताल और AIIMS, नई दिल्ली की चिकित्सा टीमों के क्लिनिकल आकलन के आधार पर संभावित जटिलताओं का समय रहते पता लगाने और आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने के लिए लगातार मेडिकल हस्तक्षेप और बिना रुकावट क्लिनिकल निगरानी जरूरी है। अस्पताल के अनुसार, उन्हें सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और उनकी स्थिति पर विशेषज्ञ लगातार नजर बनाए हुए हैं।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक को शनिवार को उनकी भूख हड़ताल के 21वें दिन दिल्ली पुलिस सफदरजंग अस्पताल लेकर गई थी। वह 28 जून से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। इस प्रदर्शन की मुख्य मांग शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना है। इसके तहत NEET समेत विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्रों से जुड़े मामलों में सरकार से जवाबदेही की मांग की जा रही है।
