अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने गुरुवार को लगातार छठी रात भी ईरान के खिलाफ अपने विनाशकारी हवाई हमलों का सिलसिला जारी रखा। इस भीषण और चौतरफा सैन्य कार्रवाई के बीच भी व्हाइट हाउस ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा किया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इतने भारी तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के रास्ते अभी भी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और ईरान इस गंभीर स्थिति से निकलने के लिए अभी भी अमेरिका के साथ किसी तरह का समझौता करने का इच्छुक दिखाई दे रहा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, यह नया सैन्य अभियान गुरुवार को दोपहर 2 बजे (ईस्टर्न टाइम) शुरू किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरानी सेना की आक्रामक क्षमताओं को पूरी तरह से पंगु और कमजोर करना है। दूसरी तरफ, ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ के मुताबिक, इस बार अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्थित रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर बंदर अब्बास को अपना मुख्य निशाना बनाया। इन भीषण हमलों की वजह से पूरे शहर के कई बड़े हिस्सों में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है और एक प्रमुख संचार टावर भी बुरी तरह तबाह हो चुका है, जिससे संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है।
इस सैन्य कार्रवाई के दौरान अमेरिकी हमलों की चपेट में बंदर अब्बास शहर का एक रिहायशी यानी आवासीय इलाका भी आ गया। आम आबादी वाले इस इलाके में मिसाइलें गिरने के कारण कम से कम सात स्थानीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में आपातकालीन चिकित्सा सहायता दी जा रही है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने साफ किया है कि उनकी सेना ने केवल ईरान के सैन्य ठिकानों और युद्धक क्षमताओं को निशाना बनाते हुए ही यह नई कार्रवाई शुरू की थी। हमले के फौरन बाद खुद ईरानी सरकारी टेलीविजन ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी मिसाइलें होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित उनके रणनीतिक तटीय शहर बंदर अब्बास और उसके आसपास के सैन्य अड्डों पर आकर गिरी हैं।
इन हमलों के शुरू होने से कुछ ही घंटे पहले, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दुनिया का ध्यान दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे चल रही गुप्त वार्ताओं की ओर खींचा था। लेविट ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा कि अमेरिकी सेना द्वारा किए जा रहे लगातार हमलों के कारण ईरान को इस समय बेहद विनाशकारी और कभी न पूरा होने वाला भारी सैन्य व आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, और यही वजह है कि ईरान लगातार अमेरिका के संपर्क में है और हमारे साथ एक कूटनीतिक समझौता करने की इच्छा जता रहा है। युद्ध के इन भयावह हालातों के बीच भी बैक-चैनल डिप्लोमेसी यानी गुप्त बातचीत जारी रहने के इस अमेरिकी दावे ने दुनिया भर के भू-राजनीतिक विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है।
