पाकिस्तान के निर्वासित नेता और मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक अल्ताफ हुसैन ने शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश गंभीर आंतरिक संकटों से जूझ रहा है, लेकिन सरकार और सैन्य नेतृत्व विदेशी मामलों में उलझा हुआ है। अल्ताफ हुसैन ने कहा कि कश्मीर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, बलूचिस्तान में लोग शवों के साथ धरना दे रहे हैं, खैबर पख्तूनख्वा की सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ी हुई है और भारत ने परमाणु पनडुब्बियां तैनात कर दी हैं, फिर भी पाकिस्तान के शासक देश के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहे।
अल्ताफ हुसैन का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। रावलाकोट में हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारे लगाए और क्षेत्र में अधिकारों तथा स्वायत्तता की मांग तेज कर दी।
लंदन में निर्वासन का जीवन बिता रहे अल्ताफ हुसैन पाकिस्तान की राजनीति के सबसे चर्चित और विवादास्पद नेताओं में गिने जाते हैं। वह मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक हैं, जो मुख्य रूप से विभाजन के बाद भारत से पाकिस्तान गए उर्दू भाषी मुहाजिर समुदाय के हितों की राजनीति करती है। कभी कराची और सिंध की राजनीति में उनका बड़ा प्रभाव था, लेकिन बाद में उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हुए और उन्हें पाकिस्तान में देशद्रोह सहित विभिन्न आरोपों का सामना करना पड़ा।
کشمیر میں لوگ سراپا احتجاج ہیں، بلوچستان میں لوگ میتیں لیکر دھرنا دیے ہوئے ہیں، پختونخوا کی صورتحال سب کے سامنے ہے، انڈیا نے ایٹمی آبدوزیں کھڑی کردی ہیں، پاکستان سنگین مسائل سے دوچار ہےلیکن حکمراں باہر کے مسائل میں مصروف ہیں۔کیا حکمرانوں کا یہ طرز عمل صحیح ہے؟
— Altaf Hussain (@AltafHussain_90) July 15, 2026
الطاف حسین pic.twitter.com/TR33143AhM
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो में अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तानी सेना और सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि बलूचिस्तान में आज भी कई परिवार अपने मारे गए परिजनों के शवों के साथ न्याय की मांग कर रहे हैं, खैबर पख्तूनख्वा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और महंगाई ने आम लोगों का जीवन कठिन कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री और सेना प्रमुख असीम मुनीर देश के अंदरूनी संकटों की बजाय अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में अधिक व्यस्त हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान सरकार और सेना गिलगित-बाल्टिस्तान, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उभर रहे राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी संकटों का समाधान करने में विफल रही है। उनके अनुसार सरकार को सबसे पहले देश के भीतर बढ़ते असंतोष, मानवाधिकारों से जुड़े आरोपों और जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
