India-UK FTA लागू: Rolls-Royce से Bentley तक लग्जरी कारें हो सकती हैं सस्ती, इंपोर्ट ड्यूटी में बड़ी कटौती

भारत और यूके (UK) के बीच मुक्त व्यापार समझौता आज 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। इसके तहत ब्रिटेन से आने वाली लग्जरी कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी 110% से घटाकर 30% कर दी गई है, जिससे रोल्स-रॉयस, लैंड रोवर जैसी कारें करोड़ों रुपये सस्ती होंगी।

रोल्स रॉयस से रेंज रोवर तक सस्ती होंगी ब्रिटिश कारें, आज से लागू हुआ भारत-यूके एफटीए
रोल्स रॉयस से रेंज रोवर तक सस्ती होंगी ब्रिटिश कारें, आज से लागू हुआ भारत-यूके एफटीए

India-UK FTA: अगर आप रोल्स-रॉयस, लैंड रोवर, जैगुआर या एस्टन मार्टिन जैसी चमचमाती ब्रिटिश लग्जरी कारों को अपने गैराज की शान बनाने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद शानदार खबर है। भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आज यानी 15 जुलाई 2026 से पूरी तरह लागू हो गया है। इस बड़े व्यापारिक समझौते का सबसे व्यापक और सीधा असर देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर पर देखने को मिलने वाला है, क्योंकि यूके से सीधे भारत आयात होने वाली आलीशान गाड़ियों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) में सरकार ने भारी कटौती कर दी है। इसके चलते आने वाले दिनों में इन कारों की आसमान छूती कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।

इस समझौते के तहत लग्जरी कारों के सस्ते होने की मुख्य वजह इंपोर्ट ड्यूटी में की गई ऐतिहासिक कटौती है। भारत-यूके एफटीए के नियमों के अनुसार, अब ब्रिटेन में निर्मित और वहां से पूरी तरह तैयार होकर भारत आने वाली (कंप्लीटली बिल्ट यूनिट – CBU) लग्जरी गाड़ियों पर लगने वाले आयात शुल्क को 110 फीसदी से सीधे घटाकर मात्र 30 फीसदी कर दिया गया है। ड्यूटी में की गई यह 80 प्रतिशत की भारी-भरकम कटौती शुरुआत में पहले साल के लिए तय की गई 20,000 कारों के विशेष कोटे पर लागू होगी। यही वजह है कि ब्रिटिश मूल के बड़े ऑटोमोबाइल ब्रांड्स जैसे रोल्स-रॉयस, लैंड रोवर, जैगुआर, एस्टन मार्टिन, मैकलारेन और बेंटले की गाड़ियां अब भारतीय ग्राहकों को पहले के मुकाबले काफी कम दाम में मिल सकेंगी, जिसके लिए कंपनियां अब अपनी नई प्राइस लिस्ट तैयार करने में जुट गई हैं।

इस ऐतिहासिक डील का सीधा फायदा उन सभी प्रीमियम वाहनों को मिलेगा जो सीधे यूके की फैक्ट्रियों में असेंबल होकर भारत आते हैं। इसके साथ ही एक और अच्छी बात यह है कि ब्रिटेन से आयात होने वाले कई मुख्य ऑटो पार्ट्स और कल-पुर्जों पर भी टैक्स कम किया गया है, जिसका असर भविष्य में इन प्रीमियम गाड़ियों की निर्माण लागत के साथ-साथ उनके मेंटेनेंस और सर्विसिंग खर्च में कमी के रूप में भी दिखेगा।

कीमतों में आने वाली कमी के गणित को समझें तो चूंकि भारत में विदेशी लग्जरी कारों की कुल कीमत में सबसे बड़ा हिस्सा सरकारी टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी का ही होता है, इसलिए 80 फीसदी ड्यूटी का घटना कार की लैंडेड कॉस्ट को बहुत नीचे ले आएगा। ऑटो सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से इन गाड़ियों के शोरूम प्राइस में 20 फीसदी से लेकर 30 फीसदी तक की सीधी और बड़ी गिरावट आ सकती है। उदाहरण के तौर पर, जिस सुपर लग्जरी कार की कीमत वर्तमान में लगभग 7 से 8 करोड़ रुपये है, वह इस नई टैक्स व्यवस्था के बाद 2 से 3 करोड़ रुपये तक सस्ती हो सकती है। इसी तरह, करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य वाली कारों पर भी ग्राहकों को 1 से 2 करोड़ रुपये तक की मोटी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है, हालांकि कार की अंतिम ऑन-रोड कीमत जीएसटी (GST), स्थानीय रोड टैक्स और डीलर के अपने प्रॉफिट मार्जिन पर भी निर्भर करेगी।

भारतीय घरेलू ऑटोमोबाइल उद्योग के हितों की रक्षा के लिए इस डील में एक बहुत ही संतुलित कोटा सिस्टम और सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। टैक्स में यह बंपर छूट पहले साल केवल 20,000 वाहनों के सीमित कोटे पर ही दी जाएगी। पारंपरिक पेट्रोल और डीजल इंजनों से चलने वाली गाड़ियों को तो आज से ही इस टैक्स छूट का तत्काल लाभ मिलना शुरू हो जाएगा, लेकिन इलेक्ट्रिक (EV) और हाइब्रिड कारों के आयात के लिए सरकार ने थोड़े अलग और कड़े नियम रखे हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि भारत में तेजी से उभर रहे घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को शुरुआती 5 वर्षों तक विदेशी कंपनियों से किसी असमान मुकाबले का सामना न करना पड़े। इसके विपरीत, एक बेहतरीन आर्थिक बढ़त यह भी मिली है कि भारत में बनी इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों को यूके के बाजार में बिना किसी ड्यूटी के (ड्यूटी-फ्री) एंट्री दी जाएगी, जिससे भारत के ऑटो एक्सपोर्ट को वैश्विक स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान मिलेगी।

इस मुक्त व्यापार समझौते का दायरा केवल आलीशान पैसेंजर कारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यूके से आने वाले भारी कमर्शियल वाहनों यानी ट्रकों पर भी टैक्स का बोझ काफी कम कर दिया गया है। वर्तमान में इन विदेशी ट्रकों के आयात पर 44 फीसदी की भारी ड्यूटी लगती है, जिसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर अगले 5 वर्षों में महज 8.8 फीसदी के करीब ले आया जाएगा। इस कदम से देश के कमर्शियल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में आधुनिक विदेशी मशीनरी और उन्नत ट्रांसपोर्टेशन के नए रास्ते खुलेंगे। हालांकि वाहन निर्माता कंपनियों ने अभी आधिकारिक रूप से अपनी नई दरों की घोषणा नहीं की है, लेकिन हर कंपनी की अपनी अलग कॉरपोरेट पॉलिसी और प्रॉफिट मार्जिन होने के कारण विभिन्न मॉडलों और उनकी इंजन क्षमता के आधार पर अगले कुछ ही दिनों में शोरूम्स में इन शानदार गाड़ियों के संशोधित और काफी कम रेट्स देखने को मिलने लगेंगे।

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