केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनोल फ्यूल को लेकर कहा है कि इसमें उनका कोई निजी हित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह लंबे समय से वैकल्पिक ईंधन के समर्थक रहे हैं और केवल इथेनोल ही नहीं, बल्कि मेथनॉल, हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक वाहनों तथा अन्य वैकल्पिक ईंधनों को भी बढ़ावा देने के पक्षधर हैं।
एक अंग्रेजी समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में गडकरी ने अपने परिवार के व्यवसाय को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के पास पहले से एक चीनी मिल है, जिसे उनके बेटे संचालित करते हैं। उन्होंने कहा कि इथेनोल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत संचालित होता है और इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है।
गडकरी ने कहा कि उनके बेटों के कारोबार में इथेनोल का हिस्सा केवल 10 प्रतिशत है। उन्होंने दावा किया कि देश के कुल इथेनोल कारोबार में उनके बेटों की फैक्टरियों की हिस्सेदारी 0.5 प्रतिशत से भी कम है। साथ ही उन्होंने बताया कि इस कारोबार पर 1,600 करोड़ रुपये का कर्ज भी है। उनके अनुसार, इस विषय को लेकर झूठी बातें फैलाई जा रही हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक देश है, इसलिए वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वह केवल गन्ने से बनने वाले इथेनोल की वकालत नहीं करते। उनके अनुसार इथेनोल का उत्पादन मक्के, पराली, बांस और चावल जैसे विभिन्न स्रोतों से भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पानीपत में पराली से, असम में बांस से और कई अन्य स्थानों पर चावल से इथेनोल बनाया जा रहा है।
गडकरी ने यह भी कहा कि ब्राजील कई दशकों से इथेनोल का उपयोग कर रहा है और वहां इससे कोई समस्या सामने नहीं आई है।
100 प्रतिशत पेट्रोल उपलब्ध कराने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसकी कीमत अधिक होगी। उन्होंने कहा कि E85 ईंधन की कीमत E20 से भी कम है। साथ ही उन्होंने कहा कि पश्चिम एशियाई देशों और अमेरिका के पास पर्याप्त तेल भंडार है, जबकि इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देश भी तेजी से बायोफ्यूल की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
