अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर में वीआईपी पास जारी करने की प्रक्रिया फिलहाल अस्थायी रूप से रुक गई है। ट्रस्ट ऑफिस के इंचार्ज ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि जिन लोगों की आईडी का इस्तेमाल वीआईपी पास जारी करने के लिए किया जाता था, उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और इसी वजह से फिलहाल यह पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि गोपाल राव भी इस समय सक्रिय रूप से काम नहीं कर रहे हैं, हालांकि ट्रस्ट के ट्रस्टी दिनेन्द्र दास के पास आवश्यक अधिकार अब भी मौजूद हैं। इंचार्ज के मुताबिक, पहले वीआईपी पास जारी करने की कोई तय सीमा निर्धारित नहीं थी और जरूरत पड़ने पर 100 या उससे अधिक पास भी जारी किए जा सकते थे। उन्होंने कहा कि गोपाल राव, चंपत राय के सहयोगी के रूप में जुड़े थे और उनके पास प्रशासनिक अधिकार थे। ट्रस्ट ऑफिस के इंचार्ज ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक ट्रस्ट की किसी भी बैठक में इन इस्तीफों को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है, इसलिए तकनीकी रूप से संबंधित अधिकारियों के अधिकार अभी भी बरकरार हैं, भले ही वे फिलहाल काम नहीं कर रहे हों।
चढ़ावा चोरी मामले के बाद गणनास्थल पर सख्त पहरा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सुरक्षा और गणना व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक सख्त कर दिया है। दान राशि की गणना करने वाले स्थल की कड़ी निगरानी के लिए 13 नए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके साथ ही दान पेटियों को मंदिर परिसर से सुरक्षित रूप से गणना केंद्र तक पहुँचाने के लिए 27 अतिरिक्त एसआईएस (SIS) सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। नई व्यवस्था के अंतर्गत अब गणनास्थल पर कुल 43 अधिकृत लोगों की मौजूदगी रहेगी। दान पेटी और गणनास्थल के बीच के विभिन्न रास्तों व स्थानों पर पुलिस बल की भी मुस्तैदी बढ़ाई गई है। विशेष रूप से पिलर नंबर-34 पर, जहाँ गुप्त दान पेटी रखी जाती है, वहाँ तीन अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। अयोध्या में नव नियुक्त एसपी सुरक्षा विजय शंकर मिश्रा ने सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी संभाल ली है।
गणनाकर्मियों के लिए बिना जेब वाली ड्रेस अनिवार्य
दान राशि की गिनती को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब गणनाकर्मियों के लिए बिना जेब वाली निर्धारित ड्रेस पहनना अनिवार्य कर दिया गया है और इस पूरी गणना प्रक्रिया की बाकायदा वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, जिन कर्मचारियों को जेल भेजा गया है उन्हें छोड़कर अन्य पुराने गणनाकर्मी अभी भी दान राशि की गिनती का कार्य कर रहे हैं। इन कर्मचारियों की नियुक्ति मूल रूप से हाउसकीपिंग के लिए हुई थी, लेकिन उन्हें दान गणना जैसे संवेदनशील कार्य में लगाया गया था। इन तमाम बदलावों के बीच ट्रस्ट ने यह भी साफ किया है कि श्रद्धालुओं के दान में कोई कमी नहीं आई है। अब ज्यादातर लोग डोनेशन काउंटर या ट्रस्ट कार्यालय में आकर रसीद लेकर ही दान देना पसंद कर रहे हैं।
बैंकिंग व्यवस्था में बदलाव और पूर्व सैनिकों की तैनाती
ट्रस्ट ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव करते हुए रिटायर्ड सैनिकों को नियुक्त किया है और उन्हें विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात किया है। इसके अलावा बैंक से जुड़े लेन-देन की व्यवस्था को भी पूरी तरह बदल दिया गया है। पहले बैंक संबंधी सारा कार्य डॉ. अनिल मिश्रा देखते थे और डिजिटल हस्ताक्षरों के माध्यम से पूरी प्रक्रिया संचालित होती थी। मगर अब नई व्यवस्था के तहत किसी भी प्रकार के बैंक लेनदेन के लिए अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, मुख्य अभियंता जगदीश आफले और चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय के संयुक्त हस्ताक्षर होना अनिवार्य कर दिया गया है।
