अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान में मिली चांदी के कथित तौर पर गायब होने के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच पूरी हो गई है। जांच रिपोर्ट में चांदी चोरी होने के आरोपों को खारिज किया गया है। इससे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को राहत मिली है और ट्रस्ट का यह दावा भी मजबूत हुआ है कि मामला किसी संगठित चोरी का नहीं, बल्कि कुछ लोगों की गलत हरकतों और प्रशासनिक कमियों से जुड़ा है।
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में ट्रस्ट के भीतर दान की वस्तुओं की संगठित चोरी या किसी बड़ी साजिश के सबूत नहीं मिले। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि विवाद की वजह दान गणना केंद्र में हुई कुछ अनियमितताएं और प्रशासनिक खामियां थीं, जिन्हें आपराधिक लापरवाही माना जा सकता है।
दान में मिली वस्तुओं को लेकर उठे सवालों के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने मंदिर में सुरक्षित रखी गई कुछ महत्वपूर्ण वस्तुओं को सार्वजनिक रूप से दिखाया। इनमें सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस भी शामिल है, जिसकी कीमत करीब 5 करोड़ रुपये बताई जाती है।
जांच के दौरान उन आरोपों की भी पड़ताल की गई, जिनमें दावा किया गया था कि दान में दी गई कुछ कीमती वस्तुएं गायब हो गई हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायण द्वारा दान की गई सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस और अनीता भारद्वाज द्वारा दान की गई चांदी की कागभुशुंडी प्रतिमा का मामला भी शामिल था। एसआईटी के अनुसार, इन सभी वस्तुओं का रिकॉर्ड ट्रस्ट के पास सुरक्षित मौजूद है।
6 जुलाई को हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में संगठनात्मक बदलाव भी किए गए। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करते हुए कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने कहा कि लाखों श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता होगी।
ट्रस्ट की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, श्रद्धालुओं से प्राप्त चांदी की वस्तुओं और आभूषणों को सुरक्षा कारणों से पिघलाकर चांदी की सिल्लियों में बदला गया है, ताकि उन्हें सुरक्षित लॉकर में रखा जा सके। इसके लिए सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की सहायता ली गई। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर को अब तक 32.2 किलोग्राम सोने और करीब 1195 किलोग्राम चांदी की वस्तुएं दान में मिली हैं, जिनमें से 944 किलोग्राम कीमती धातु को रीसाइकिल कर सिल्लियों में बदला जा चुका है।
एसआईटी की रिपोर्ट में दान से जुड़े मामले में पहले प्रकाशित तीन समाचार रिपोर्टों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें दानदाताओं की ओर से लगाए गए आरोप शामिल थे। जांच में इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि मंदिर को दान में प्राप्त सभी 2926 कीमती वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है और श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर ट्रस्ट प्रशासन से इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
