अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर मचे घमासान के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आज होने वाली बेहद अहम बैठक से ठीक पहले, ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने एक भावुक और कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक सियासी और धार्मिक हलकों में हलचल काफी तेज हो गई है। महंत नृत्य गोपाल दास ने अपने पत्र में राम मंदिर में हुई चोरी की इस शर्मनाक घटना पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि प्रभु श्री रामलला के दरबार में जिसने भी यह पाप किया है, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए और कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
महंत नृत्य गोपाल दास ने इस पूरे घटनाक्रम पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यप्रणाली पर पूरा भरोसा जताया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि दोनों नेता इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर हर उस चेहरे को बेनकाब करेंगे और सजा दिलाएंगे जो इस महापाप में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर शुरू हुई सियासी बयानबाजी और राजनीति पर भी कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की है कि यह मामला देश-विदेश के करोड़ों हिंदुओं की अटूट आस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए किसी को भी अपने निजी या राजनीतिक लाभ के लिए इस संवेदनशील विषय पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
महंत नृत्य गोपाल दास का यह पत्र ऐसे नाजुक समय पर आया है जब आज दोपहर तीन बजे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक होने जा रही है। माना जा रहा है कि चढ़ावा चोरी की इस घटना से ट्रस्ट की वैश्विक छवि को जो भारी नुकसान पहुंचा है, यह बैठक उसी को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक के एजेंडे में कई संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। बैठक में न केवल चढ़ावा चोरी मामले की जांच और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी, बल्कि बीते वित्तीय वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा होनी है। इसके अलावा, सबसे बड़ा फैसला ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों को लेकर होना है, जिन्होंने विवाद सामने आने के बाद अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की पेशकश की थी। सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान इन दोनों बड़े पदाधिकारियों को अपना पक्ष और सफाई रखने का पूरा मौका दिया जाएगा, जिसके बाद ट्रस्ट के बाकी सदस्य सर्वसम्मति से उनके इस्तीफे को स्वीकार करने या न करने पर अंतिम मुहर लगाएंगे।
