मुंबई: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के वडोदरा-मुंबई सेक्शन को 31 अगस्त 2026 तक ट्रैफिक के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि निर्धारित समय पर काम पूरा होने के बाद मुंबई और वडोदरा के बीच यात्रा का समय लगभग 8 घंटे से घटकर करीब 4 घंटे रह जाएगा।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है। यह करीब 1,400 किलोमीटर लंबा, 8-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 1 लाख करोड़ रुपये है। यह परियोजना हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र को आपस में जोड़ेगी।
फिलहाल मुंबई से वडोदरा तक पहुंचने में लगभग 8 घंटे का समय लगता है और कई स्थानों पर ट्रैफिक जाम के कारण यात्रा और लंबी हो जाती है। एक्सप्रेसवे का यह सेक्शन शुरू होने के बाद यात्रा का समय लगभग आधा रह जाएगा। साथ ही सड़क पर सफर अधिक सुगम, सुरक्षित और आरामदायक होने की उम्मीद है।
इस परियोजना से केवल यात्रियों को ही नहीं, बल्कि कारोबार और परिवहन क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। तेज ट्रक आवाजाही, सामान की शीघ्र डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, ईंधन की बचत और उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी जैसे कई फायदे मिलने की उम्मीद है। इससे विभिन्न शहरों के बीच माल ढुलाई पहले की तुलना में अधिक तेज और किफायती हो सकेगी।
एक्सप्रेसवे को जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) से भी जोड़ा जा रहा है। इसके जरिए उत्तर भारत से आने वाला माल सीधे और तेजी से बंदरगाह तक पहुंच सकेगा। इससे निर्यात प्रक्रिया तेज होने, परिवहन व्यवस्था बेहतर होने, ट्रकों का समय बचने और माल ढुलाई की लागत कम होने की संभावना जताई जा रही है।
वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर का महाराष्ट्र हिस्सा लगभग 157 किलोमीटर लंबा है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 24,000 करोड़ रुपये है। इस सेक्शन का निर्माण कुल सात पैकेजों में किया जा रहा है। इनमें से पांच पैकेजों का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष दो पैकेज अगस्त 2026 तक पूरे होने की उम्मीद है। लक्ष्य है कि 31 अगस्त 2026 तक महाराष्ट्र का पूरा सेक्शन ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाए।
परियोजना पूरी होने के बाद आम लोगों को भी कई फायदे मिलने की उम्मीद है। पारिवारिक यात्राएं आसान होंगी, व्यावसायिक यात्राओं में समय बचेगा, ट्रक और मालवाहक वाहन समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे, उद्योगों की लागत कम हो सकती है और निवेश तथा रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। साथ ही समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
