Flood Crisis in Assam: असम और उसके पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार मानसूनी बारिश के कारण आई बाढ़ की पहली लहर ने पूरे राज्य में हाहाकार मचा दिया है। कई इलाके पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं और सैकड़ों परिवार बेघर होने को मजबूर हैं। इसी बीच असम के धेमाजी जिले से एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां सिमेन नदी के तेज बहाव और भारी जलभराव के कारण एक महत्वपूर्ण रेलवे पुल का हिस्सा आंशिक रूप से ढह गया है। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि नदी के किनारों पर हुए भीषण भू-कटाव के कारण इस रूट की सभी रेल सेवाओं को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है।
एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, धेमाजी जिले और उसके आस-पास के कैचमेंट एरिया में रिकॉर्ड 110 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है, जिसने अचानक बाढ़ और मिट्टी के कटाव की भयावह स्थिति पैदा कर दी। इसी वजह से आर्चीपाथर और सिमेन चपारी रेलवे स्टेशनों के बीच स्थित पुल का एक खंभा (पियर) अपनी जगह से पूरी तरह हिल गया और अस्थिर हो गया। यह रेलवे पुल मूल रूप से साल 1965 में बनाया गया था, जिसे बाद में मीटर गेज से ब्रॉड गेज में बदला गया था।
अधिकारियों ने बताया कि इस रूट पर ट्रैफिक कम होने और बाढ़ के शुरुआती खतरे को देखते हुए ट्रेनों की आवाजाही पहले ही रोक दी गई थी, जिसकी वजह से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और किसी भी यात्री के घायल होने की खबर नहीं है। तिनसुकिया डिवीज़न के तहत आने वाले मुर्कोंगसेलेक और शिलापाथर के बीच की सभी ट्रेन सेवाएं अगली सूचना तक पूरी तरह निलंबित रहेंगी और अब ट्रेनें केवल शिलापाथर स्टेशन तक ही आ-जा सकेंगी। रेलवे प्रशासन ने प्रभावित यात्रियों की सुविधा के लिए धेमाजी, शिलापाथर और मुर्कोंगसेलेक स्टेशनों पर हेल्प डेस्क स्थापित किए हैं और यात्रियों के लिए बसों का वैकल्पिक इंतजाम किया जा रहा है।
बाढ़ की तबाही यहीं नहीं रुकी; जोनाई क्षेत्र में भी एक और बड़ा हादसा हुआ जहां केमी और ओयान इलाकों को जोड़ने वाला केमी नदी पर बना 300 मीटर लंबा लोहे का पुल ताश के पत्तों की तरह पानी में बह गया। इस पुल के ढहने से केमी-पुराना जेलोम इलाके और जोनाई सदर के बीच का सड़क संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ों से सुबह 11:00 बजे से आ रहे पानी के भारी और तेज बहाव के कारण नदी का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया था। ग्रामीणों ने प्रशासन पर नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि यह पुल महज एक साल पहले ही बनकर तैयार हुआ था। निर्माण के समय ग्रामीणों ने केमी नदी की तेज और शक्तिशाली धारा का हवाला देते हुए लोहे के बजाय एक मजबूत पक्के कंक्रीट के पुल की मांग की थी, लेकिन उनकी मांग को दरकिनार कर एक साधारण लोहे का पुल खड़ा कर दिया गया जो पहली बड़ी बाढ़ भी नहीं झेल सका। इस पुल के गिरने से स्थानीय बच्चों की शिक्षा और किसानों की खेती-बाड़ी पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की ताजा रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, इस मानसूनी सैलाब से असम के छह प्रमुख जिलों धेमाजी, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़, चिरांग, लखीमपुर और कोकराझार में कुल 22,124 लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इनमें से धेमाजी जिला बाढ़ की मार सबसे ज्यादा झेल रहा है, जहां अकेले 15,483 लोग संकट में हैं। बाढ़ का गंदा और तेज पानी अब तक 96 गांवों के रिहायशी इलाकों में घुस चुका है, जिससे लगभग 1,690 हेक्टेयर में लगी खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। लगातार हो रही बारिश से ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर उफान पर है, वहीं शिवसागर जिले के नांगलामुराघाट में दिसांग नदी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है।
इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल इंसानों बल्कि बेजुबानों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है, और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ की इस मौजूदा लहर में अब तक 48,199 मवेशी और जानवर प्रभावित हुए हैं। राज्य आपदा प्रबंधन की टीमें जिला प्रशासन के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी रख रही हैं और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
