अयोध्या मर्डर/चोरी केस में नया मोड़! ‘उस काले बैग’ में क्या था? अविनाश शुक्ला के वायरल वीडियो से मची खलबली, घर-घर तलाशी

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। इस बीच 24 सेकंड का एक कथित CCTV वीडियो सामने आया है, जिसमें आरोपी अविनाश शुक्ला पुलिस और बैंक कर्मियों के साथ एक सफेद रंग की कार की ओर जाता दिखाई दे रहा है। वीडियो में उसके हाथ में एक काला बैग भी नजर आ रहा है।

अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले की जांच अब हर गुजरते दिन के साथ एक बेहद संवेदनशील और नए मोड़ पर पहुंच गई है। इस पूरे प्रकरण में अब 24 सेकंड का एक बेहद चौंकाने वाला सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वीडियो में मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला पुलिस टीम और बैंक कर्मियों की मौजूदगी में एक सफेद रंग की कार की तरफ जाता हुआ दिखाई दे रहा है और उसके हाथ में एक काले रंग का बैग साफ नजर आ रहा है। जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इसी काले बैग में वह चोरी की नकदी मौजूद थी, जिसे पुलिस ने अपनी प्रारंभिक कार्रवाई के दौरान बरामद किया था। इस नए सबूत के सामने आने के तुरंत बाद हरकत में आई अयोध्या पुलिस ने मामले में गिरफ्तार सभी सात आरोपियों के घरों पर एक साथ औचक छापेमारी की है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

सामने आया 5 जून का सीसीटीवी फुटेज और नकदी का राज

मामले को गहराई से खंगाल रही जांच एजेंसियों के हाथ लगा यह सीसीटीवी फुटेज 5 जून 2026 की रात करीब 8 बजकर 13 मिनट का बताया जा रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुलिस और बैंक के अधिकारियों का एक दल आरोपी अविनाश शुक्ला को घेरकर सफेद कार तक ले जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मंदिर के चढ़ावे में बड़े स्तर पर कथित वित्तीय गड़बड़ी और चोरी की पहली भनक लगी थी, तब ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के निर्देश पर एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस के साथ मिलकर तत्काल अविनाश शुक्ला के गुप्त ठिकाने पर छापा मारा था। दावा किया जा रहा है कि इसी कार्रवाई के दौरान उसके पास से लगभग पांच लाख रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद की गई थी। हालांकि, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इस बड़ी बरामदगी की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन जांच की कड़ियों से जुड़े आधिकारिक सूत्र लगातार इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। इस फुटेज के सामने आने के बाद अब यह चर्चा भी जोरों पर है कि पुलिस के संज्ञान में यह पूरा मामला 7 जून को आधिकारिक रूप से सार्वजनिक होने से दो दिन पहले यानी 5 जून को ही आ चुका था, लेकिन उस समय ट्रस्ट की तरफ से कोई औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।

जिला प्रशासन की निगरानी में घर-घर हुई बारीकी से तलाशी

मामले की कड़ियों को आपस में जोड़ने और वित्तीय सबूत जुटाने के लिए अयोध्या पुलिस की अलग-अलग विशेष टीमों ने रविवार की सुबह एक साथ सभी सातों गिरफ्तार आरोपियों के घरों पर धावा बोल दिया। डिप्टी एसपी स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी की अगुवाई में शुरू हुए इस तलाशी अभियान में पुलिस बल के साथ जिला प्रशासन की एक विशेष टीम भी मुख्य रूप से तैनात रही ताकि पूरी क्रिमिनल प्रोसीडिंग में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार के कानूनी सवाल न उठें। पुलिस की टीमों ने मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, उसके भतीजे मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा और रमाशंकर मिश्रा सहित सभी आरोपियों के घरों की कोना-कोना खंगाल डाला। स्वर्गद्वार मोहल्ले में स्थित टिन्नू यादव और मनीष यादव के पैतृक घर पर करीब ढाई घंटे तक चली इस मैराथन कार्रवाई के दौरान परिजनों की मौजूदगी में घर की अलमारियां, लोहे के बक्से, व्यक्तिगत पर्स और गुप्त तहखानों तक की बारीकी से जांच की गई। हालांकि, मौके पर मौजूद गवाहों और पड़ोसियों के अनुसार तलाशी के दौरान कोई बड़ी नकदी या हथियार बरामद नहीं हुआ, लेकिन पुलिस ने परिवार के सदस्यों से कई दौर की पूछताछ कर जरूरी लिखापढ़ी की है।

जेवरात और प्रॉपर्टी के दस्तावेजों की जांच के साथ अब वित्तीय ऑडिट की तैयारी

भले ही रविवार को हुई इस छापेमारी में पुलिस को तुरंत कोई बड़ी नकदी हाथ न लगी हो, लेकिन कुछ आरोपियों के घरों से भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवरात और बेनामी संपत्तियों से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज बरामद हुए हैं। जांच एजेंसियां अब इन सभी कागजातों का राजस्व विभाग से सत्यापन कराने में जुट गई हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये संपत्तियां कब खरीदी गईं, इनकी बाजार में वास्तविक कीमत क्या है और इनके लिए चुकाई गई रकम का मुख्य स्रोत क्या था। पुलिस को पुख्ता शक है कि मंदिर के चढ़ावे से चुराई गई बड़ी धनराशि का इस्तेमाल इन संपत्तियों और आभूषणों को खरीदने के लिए किया गया हो सकता है।

जांच का अगला और सबसे महत्वपूर्ण चरण अब आरोपियों के निजी बैंक खातों, पिछले कुछ वर्षों के वित्तीय लेनदेन और उनके परिवारों के आर्थिक रिकॉर्ड खंगालने पर केंद्रित रहेगा। पुलिस अब आय के वैध स्रोतों और बैंक ट्रांजैक्शन का एक विस्तृत फॉरेंसिक ऑडिट कराने की तैयारी कर रही है ताकि यह पूरी तरह स्पष्ट हो सके कि कथित चोरी की रकम का साम्राज्य कहां-कहां फैला हुआ है। हालांकि, कई बड़ी गिरफ्तारियां और ताबड़तोड़ छापेमारी जारी है, लेकिन इस केस में अभी भी कई अनुत्तरित सवाल बने हुए हैं कि यदि 5 जून को ही नकदी बरामद हो गई थी तो औपचारिक केस दर्ज होने में देरी क्यों हुई, क्या उस काले बैग में वाकई पांच लाख रुपये ही थे और क्या इस पूरे सिंडिकेट में मंदिर या बैंक के कुछ और बड़े चेहरों की भूमिका भी आने वाले दिनों में बेनकाब हो सकती है।

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