Bangladesh Parliament: बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर भारत को लेकर तल्खी देखने को मिल रही है। मुख्य विपक्षी दल ‘नेशनल सिटिजन पार्टी’ के सांसद और विपक्ष के मुख्य सचेतक नाहिद इस्लाम ने भारत से आधिकारिक तौर पर माफी की मांग की है। बांग्लादेश की संसद में वर्ष 2026-27 के प्रस्तावित राष्ट्रीय बजट पर चल रही चर्चा के दौरान नाहिद इस्लाम ने भारत की विदेश नीति पर कड़े प्रहार किए। उनका कहना है कि पिछले 16 वर्षों तक शेख हसीना की ‘अत्याचारी’ अवामी लीग सरकार का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करने के लिए नई दिल्ली को ढाका से माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों की सीमा पर जारी तनाव और ‘पुश-इन’ जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर भारत पर कई आरोप लगाए और अपनी सरकार से इस मामले में सख्त रुख अपनाने की अपील की।
संसद को संबोधित करते हुए मुख्य सचेतक नाहिद इस्लाम ने रविवार को कहा कि बांग्लादेश में भारत के नवनियुक्त उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी को ढाका की जमीन पर कदम रखते ही सबसे पहले माफी मांगनी चाहिए थी। यह माफी उस राजनीतिक और रणनीतिक समर्थन के लिए होनी चाहिए थी जो भारत ने पिछले डेढ़ दशक से ज्यादा समय तक अवामी लीग सरकार को दिया।
नाहिद ने केवल अवामी लीग के समर्थन पर ही आपत्ति नहीं जताई, बल्कि हाल ही में शेख हसीना के खिलाफ हुए बड़े आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा और शरीफ उस्मान हादी की हत्या के आरोपियों को भारत में शरण दिए जाने को लेकर भी नई दिल्ली की ओर सीधे उंगली उठाई।
नाहिद इस्लाम ने भारतीय उच्चायुक्त के बयानों को दिखावा बताते हुए संसद में कहा कि नए उच्चायुक्त ने बांग्लादेश आने के बाद दोनों देशों के बीच साझा आसमान और साझा जमीन को लेकर कई मीठी-मीठी बातें की हैं, लेकिन बांग्लादेश के लोग पिछले 16 साल के कड़वे अनुभवों को इतनी आसानी से नहीं भूले हैं। उन्होंने कहा कि इन औपचारिक और मीठी बातों के बजाय भारतीय राजदूत को यह स्पष्ट रूप से बताना चाहिए था कि नई दिल्ली अब सम्मान और समानता के नए सिद्धांतों के आधार पर बांग्लादेश के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को कैसे आगे बढ़ाना चाहती है।
द्विपक्षीय संबंधों के अलावा नाहिद ने भारत-बांग्लादेश सीमा प्रबंधन को लेकर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भारत सरकार निर्दोष लोगों को अवैध बांग्लादेशी नागरिक बताकर जबरन बांग्लादेश की सीमा में धकेलने (पुश-इन) की कोशिश कर रही है। नाहिद ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जब से बांग्लादेश में नई सरकार सत्ता में आई है, तब से लेकर अब तक बॉर्डर पर भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा 10 बांग्लादेशी नागरिकों की हत्या की जा चुकी है। उन्होंने इस बात पर भी गहरी नाराजगी जताई कि संसद के इस महत्वपूर्ण बजट सत्र के दौरान इतने बड़े और संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा करने के लिए समय आवंटित नहीं किया गया।
संसद में अपने भाषण के दौरान विपक्षी सांसद ने भारत के राज्य पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी के हालिया बयानों का भी विशेष रूप से जिक्र किया। नाहिद ने आरोप लगाया कि कुछ भारतीय राजनेता बांग्लादेश की संप्रभुता और आंतरिक मामलों को लेकर लगातार ‘गैर-जिम्मेदाराना’ टिप्पणियां कर रहे हैं, जिसका बांग्लादेश सरकार और विदेश मंत्रालय को बेहद कड़ा और कूटनीतिक जवाब देना चाहिए। उन्होंने कार्यवाहक प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार को घेरते हुए कहा कि उनकी ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ (बांग्लादेश सबसे पहले) की नीति केवल भाषणों और वादों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर फैसलों में भी दिखनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने पड़ोसी देशों के साथ सम्मानजनक और बराबरी के रिश्ते बनाने की पूरी जिम्मेदारी मौजूदा सरकार की है और तारिक रहमान को इस दिशा में बिना किसी दबाव के सख्ती से काम करने की सख्त जरूरत है।
