कोलकाता: पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने राज्य में धर्मांतरण रोकने के लिए नया और कड़ा कानून लाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार सिर्फ धर्मांतरण विरोधी कानून ही नहीं, बल्कि समान नागरिक संहिता (UCC) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को भी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। उनके इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।
रवींद्र सदन में ‘वंदे मातरम’ गीत की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अवैध घुसपैठ जनसांख्यिकीय बदलाव के साथ-साथ लव जिहाद जैसी समस्याओं की एक बड़ी वजह बन रही है। उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जल्द ही धर्मांतरण विरोधी कानून लाया जाएगा। इसके अलावा UCC और NRC को लागू करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति के लिए खतरा बन रहे हैं, उन्हें वापस भेजा जाएगा।
उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक उत्पीड़न झेलने के बाद भारत आए हिंदुओं को शरणार्थी माना जाएगा और उन्हें कानून के प्रावधानों के अनुसार नागरिकता प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम में उन्होंने वर्ष 1975 के आपातकाल का विरोध करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को 9 अगस्त को सम्मानित करने की घोषणा भी की। इसके अलावा भवानीपुर में नए भाजपा कार्यालय का उद्घाटन भी किया।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। ममता बनर्जी के आवास पर हुई बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों और उनके कार्यकर्ताओं को डराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इससे जनता की आवाज नहीं दबाई जा सकती।
महुआ मोइत्रा ने प्रस्तावित ‘बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई। उनका दावा था कि इस कानून के तहत केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को बिना न्यायिक सुनवाई के एक वर्ष तक हिरासत में रखने का प्रावधान किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रस्तावित कानून मीसा (MISA) और यूएपीए (UAPA) जैसे कानूनों से भी अधिक कठोर साबित हो सकता है।
उधर, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष जनता के बीच भ्रम और भय का वातावरण बनाने की कोशिश कर रहा है। भाजपा के अनुसार, प्रस्तावित कानून का मकसद संगठित अपराध, सिंडिकेट राज, जबरन वसूली और राजनीतिक हिंसा पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। पार्टी का यह भी कहना है कि दंगों या हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से नुकसान की भरपाई भी कराई जाएगी।
