हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर तनाव: पीट हेगसेथ बोले- ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगी

अमेरिका के वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिकी नौसेना जरूरत पड़ने पर ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी लंबे समय तक जारी रख सकती है। गुरुवार को पनामा सिटी में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना अपने जहाजों को बदल-बदलकर इस अभियान को आगे चलाने की क्षमता रखती है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री (वॉर सेक्रेटरी) पीट हेगसेथ ने पनामा सिटी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए चेतावनी दी है कि संयुक्त राज्य अमेरिका आवश्यकतानुसार जब तक चाहे ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी अनिश्चितकाल के लिए जारी रख सकता है। हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी नौसेना क्षेत्र में जहाजों की अदला-बदली यानी रोटेशन करके इस रणनीति को लंबे समय तक बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम है। पेंटागन का यह सख्त रुख ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच रणनीतिक जलमार्ग खोलने को लेकर बातचीत पूरी तरह रुकी हुई है।

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया था कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है और यह नियंत्रण आगे भी बना रहेगा। ट्रंप ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की तुलना ‘स्टील की दीवार’ से करते हुए कहा कि ईरान अब मध्य पूर्व का दादा नहीं रहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि तेहरान का सैन्य ढांचा पूरी तरह नष्ट हो चुका है और वहां महंगाई की दर 300 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री के इन तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान की ‘पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ (PGSA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी अधिकारियों की बयानबाजी से जमीनी हकीकत नहीं बदलती। ईरान ने स्पष्ट किया कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य अभी-भी पूरी तरह बंद है और जब तक तेहरान की शर्तें स्वीकार नहीं की जातीं, इसे किसी भी कीमत पर फिर से नहीं खोला जाएगा।

इस भीषण तनातनी के कारण वैश्विक कच्चे तेल के बाजारों और व्यापारिक जहाजरानी मार्गों पर भारी अनिश्चितता का माहौल बन गया है। हॉर्मुज़ दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल आने और व्यापक युद्ध छिड़ने का खतरा हमेशा बना रहता है। मौजूदा हालात को देखते हुए इस क्षेत्र में नौसैनिक गश्त बढ़ा दी गई है, कमर्शियल शिपिंग कंपनियों ने अपने रास्ते बदल लिए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक संयम बरतने की अपील की जा रही है। वर्तमान में इस मार्ग से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही कड़ी सुरक्षा निगरानी में हो रही है, जबकि कूटनीतिक प्रयास इस बात पर केंद्रित हैं कि किसी तरह अस्थायी सीजफायर के जरिए इस संकट का हल निकाला जा सके।

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