नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के उस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, जिसमें कहा गया है कि पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं। मंत्रालय ने इस बयान के साथ पासपोर्ट सेवाओं से जुड़े कई आंकड़े भी साझा किए हैं। वहीं, इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिवक्ता और राजनीतिज्ञ कपिल सिब्बल तथा लेखक जावेद अख्तर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान सरकार ने 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं प्रदान की हैं। इनमें केवल पासपोर्ट की संख्या 1.39 करोड़ रही। उन्होंने बताया कि पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया को छोड़कर पासपोर्ट जारी होने में औसतन छह कार्य दिवस लगते हैं। वहीं, पासपोर्ट सेवा केंद्रों और पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्रों पर आवेदकों को 45 मिनट से भी कम समय देना पड़ता है।
अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में देशभर में 545 पासपोर्ट सेवा केंद्र संचालित हैं, जबकि एक दशक पहले इनकी संख्या केवल 77 थी। इस तरह केंद्रों की संख्या में छह गुना से अधिक वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 10 नए पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले गए थे और इस वर्ष भी 10 नए केंद्र खोले जाने की योजना है।
विदेश मंत्रालय के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज मान्य होगा। उन्होंने आशंका जताई कि इसी आधार पर बूथ लेवल अधिकारी किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह कर सकते हैं और उसका मतदान का अधिकार प्रभावित हो सकता है। सिब्बल ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाना चाहिए।
MEA
— Kapil Sibal (@KapilSibal) June 24, 2026
June 24, 2026 :
“A passport is a travel document, and not a document of citizenship.”
Which document then is proof of citizenship?
BLO can doubt my citizenship
Deprive me of my vote
Result
BJP wins the election
Over to Supreme Court !
वहीं, लेखक जावेद अख्तर ने भी मंत्रालय के बयान पर हैरानी जताई। उन्होंने सवाल किया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो क्या सरकार बिना पूरी तरह यह सुनिश्चित किए कि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक है, उसे पासपोर्ट जारी कर रही है। उन्होंने इस स्थिति को बेतुका बताया।
The ministry of external affairs says that a passport is a document travel not the proof of citizen ship . Really ??? . So are they providing this travel document to some people with out being totally convinced that this person is an Indian citizen ?? . It is absurd .
— Javed Akhtar (@Javedakhtarjadu) June 24, 2026
इस दौरान विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने भारतीय नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा सुविधाओं में हुए विस्तार की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब भारतीय नागरिक 27 देशों में बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं, जबकि वर्ष 2019 में यह संख्या 16 थी। इसके अलावा 47 देश भारतीय नागरिकों को आगमन पर वीजा (वीजा-ऑन-अराइवल) की सुविधा देते हैं और 66 देशों में ई-वीजा उपलब्ध है।
अधिकारी के अनुसार, भारत ने अधिकांश यूरोपीय देशों के साथ मोबिलिटी समझौते किए हैं। इन समझौतों से छात्रों, शिक्षकों, कामगारों, पर्यटकों और व्यापारियों के लिए आवागमन आसान हुआ है। साथ ही, इन व्यवस्थाओं के जरिए गैरकानूनी रूप से रह रहे प्रवासियों की वापसी की प्रक्रिया को भी सरल बनाने में मदद मिलती है।
