स्विट्जरलैंड के जेनेवा में ईरान और अमेरिका के बीच जारी वार्ता के दौरान तनाव और कूटनीति का सिलसिला साथ-साथ चलता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई संबंधी चेतावनी के बाद बातचीत कुछ समय के लिए धीमी पड़ गई, लेकिन बाद में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल फिर से वार्ता की मेज पर लौट आए। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों को उम्मीद है कि बातचीत देर रात तक जारी रह सकती है, जिससे संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष अभी भी समाधान की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
रविवार को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान के साथ समझौता नहीं होता है तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर अमेरिका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में कदम उठा सकता है। ट्रंप के इस बयान के बाद वार्ता का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इसे बातचीत पर दबाव बनाने की कोशिश बताया।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की टिप्पणी के बाद ईरानी पक्ष ने कुछ समय के लिए बातचीत की रफ्तार धीमी कर दी थी। हालांकि ईरान से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया कि वार्ता पूरी तरह बंद नहीं हुई थी, बल्कि केवल अस्थायी रूप से रुकी थी। इसके बाद दोनों पक्षों ने दोबारा चर्चा शुरू की और बातचीत आगे बढ़ी।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वार्ता केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और लेबनान की स्थिति जैसे अहम मुद्दे भी शामिल हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अधिक पारदर्शिता दिखाए और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाए।
दूसरी ओर, ईरान अपने रुख पर कायम है। तेहरान का कहना है कि जब तक लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई नहीं रुकती, तब तक किसी व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ना मुश्किल होगा। ईरान का मानना है कि क्षेत्रीय संघर्षों को नजरअंदाज कर केवल परमाणु मुद्दे पर समाधान निकालना व्यावहारिक नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वार्ता किसी शतरंज की बाजी से कम नहीं है। एक तरफ ट्रंप दबाव की रणनीति के जरिए ईरान से अधिक रियायतें हासिल करना चाहते हैं, जबकि दूसरी ओर तेहरान अपने क्षेत्रीय हितों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर समझौता करने के मूड में नहीं दिख रहा। फिलहाल बातचीत का जारी रहना कूटनीतिक समाधान की उम्मीद को जिंदा रखे हुए है, लेकिन अंतिम समझौते तक पहुंचने का रास्ता अभी भी काफी जटिल और चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
