डॉलर रिजर्व बढ़ाने और रुपये को मजबूती देने के लिए आरबीआई का बड़ा फैसला, एनआरआई डिपॉजिट पर ब्याज दरों की सीमा हटाई

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी यानी नकदी के प्रवाह को बढ़ाने, भारतीय करेंसी (रुपये) को बाहरी झटकों से बचाने और देश के डॉलर रिजर्व को रिकॉर्ड स्तर पर ले जाने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा नीतिगत फैसला लिया है।

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ाने, विदेशी मुद्रा प्रवाह को प्रोत्साहित करने और रुपये को मजबूती देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने कुछ FCNR(B) और NRE जमा योजनाओं पर ब्याज दरों की ऊपरी सीमा को 30 सितंबर 2026 तक अस्थायी रूप से हटा दिया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य विदेशों में रहने वाले भारतीयों (NRI) को भारत में अधिक विदेशी मुद्रा जमा करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

अब तक बैंकों को FCNR(B) और NRE खातों पर RBI द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक ब्याज देने की अनुमति नहीं थी। नई व्यवस्था के तहत बैंक अपनी आवश्यकता और बाजार की स्थिति के अनुसार इन खातों पर अधिक ब्याज दर की पेशकश कर सकेंगे। इससे NRI ग्राहकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना है और भारत में डॉलर सहित अन्य विदेशी मुद्राओं का प्रवाह बढ़ सकता है।

RBI के अनुसार यह छूट 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद बैंक FCNR(B) और NRE जमा पर प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें देने के लिए स्वतंत्र होंगे। कुछ बैंकों ने इस फैसले के बाद 6 से 7 प्रतिशत या उससे अधिक ब्याज दर वाले नए FCNR(B) डिपॉजिट उत्पाद भी पेश करने शुरू कर दिए हैं।

FCNR(B) यानी फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) खाता एक विशेष सावधि जमा योजना होती है, जिसमें NRI अपनी विदेशी मुद्रा जैसे डॉलर, पाउंड या यूरो में धन जमा करते हैं। जमा राशि और ब्याज दोनों उसी विदेशी मुद्रा में वापस मिलते हैं, जिससे विनिमय दर के उतार-चढ़ाव का जोखिम नहीं रहता।

वहीं NRE यानी नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल अकाउंट ऐसा खाता होता है, जिसमें विदेश में अर्जित आय को भारतीय रुपये में जमा किया जाता है। NRI इस खाते के माध्यम से विदेश और भारत दोनों जगह से लेनदेन कर सकते हैं तथा जमा राशि पर ब्याज का लाभ भी प्राप्त करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि RBI के इस कदम से विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिल सकती है। अनुमान है कि इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 35 से 40 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। अधिक विदेशी मुद्रा आने से रुपये पर दबाव कम होगा और उसकी स्थिरता को भी समर्थन मिलेगा। साथ ही बैंकों के पास अधिक संसाधन उपलब्ध होने से उनकी कर्ज देने की क्षमता भी बढ़ सकती है।

इस फैसले का लाभ मुख्य रूप से विदेशों में रहने वाले भारतीयों को मिलेगा। भारत में रहने वाले सामान्य ग्राहकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) योजनाओं या उनकी ब्याज दरों पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

इसी बीच RBI ने बैंकिंग प्रणाली में नकदी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी कदम उठाया है। कंपनियों द्वारा एडवांस टैक्स जमा किए जाने के कारण बैंकों के पास नकदी की कमी देखी गई थी। इसे देखते हुए केंद्रीय बैंक ने बैंकों को 72,300 करोड़ रुपये की अल्पकालिक फंडिंग उपलब्ध कराई है। माना जा रहा है कि इससे बाजार में नकदी का संतुलन बना रहेगा और ब्याज दरों में अचानक बढ़ोतरी की आशंका कम होगी। साथ ही रुपये, शेयर बाजार और बॉन्ड बाजार को भी इससे सहारा मिलने की उम्मीद है।

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