दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd) के डिमर्जर (व्यवसाय विभाजन) की जटिल और महत्वाकांक्षी प्रक्रिया आखिरकार सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। इस डिमर्जर के रणनीतिक कदम के तहत समूह के विभिन्न व्यवसायों को अलग कर चार नई स्वतंत्र कंपनियां बनाई गई हैं। इनमें वेदांता एल्युमिनियम, वेदांता आयरन एंड स्टील, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता पावर शामिल हैं, जिन्हें भारतीय शेयर बाजार में आधिकारिक रूप से लिस्ट कर दिया गया है। इस नए बदलाव के बाद, अब मूल कंपनी वेदांता लिमिटेड को मिलाकर शेयर बाजार में समूह की कुल पांच लिस्टेड कंपनियां हो गई हैं।
इस ऐतिहासिक और खास मौके पर वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने देश की आर्थिक प्रगति और समूह के भविष्य को लेकर बड़ा भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भारत में वर्तमान समय में विकास के अभूतपूर्व और बड़े अवसर मौजूद हैं। इन सभी नई कंपनियों को आगे बढ़कर देश की तरक्की में अपनी बड़ी भूमिका निभानी होगी। अनिल अग्रवाल ने रेखांकित किया कि ये चारों सेक्टर्स बेहद रोमांचक हैं और इनमें विकास की अपार संभावनाएं छिपी हैं। उन्होंने शेयरधारकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रबंधन लगातार डिविडेंड देने वाली कंपनी बने रहने और निवेशकों के लिए लगातार वैल्यू क्रिएशन (मूल्य संवर्धन) करने को लेकर बेहद गंभीर व सचेत है।
हर कंपनी में है $100 अरब राजस्व बनाने की क्षमता: अनिल अग्रवाल
वेदांता चेयरमैन ने भारत के घरेलू बाजार में मौजूद व्यावसायिक संभावनाओं पर विशेष जोर देते हुए समूह के अगले पांच सालों के लिए एक मेगा इन्वेस्टमेंट प्लान की रूपरेखा साझा की। उन्होंने घोषणा की कि वेदांता समूह अगले पांच वर्षों के भीतर विभिन्न क्षेत्रों में 20 अरब डॉलर (लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम नया निवेश करने जा रहा है। उन्होंने बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा, “हमारी नई बनी हर एक स्वतंत्र कंपनी में आने वाले समय में 100 अरब डॉलर का सालाना रेवेन्यू (राजस्व) हासिल करने की विशाल क्षमता मौजूद है।” शेयरधारकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि उनके निवेशकों के हित से बढ़कर कंपनी के लिए कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है, और यही कारण है कि पिछले पांच सालों में वेदांता ने अपने शेयरधारकों को 300% का बंपर रिटर्न कमा कर दिया है।
प्राकृतिक संसाधनों के आयात पर निर्भरता कम करना देश के लिए जरूरी
अनिल अग्रवाल के मुताबिक, भारत वर्तमान में अपनी प्राकृतिक संसाधनों (नेचुरल रिसोर्सेज) की कुल जरूरतों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसे देश के आर्थिक हित में जल्द से जल्द कम करना बेहद जरूरी है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर इशारा करते हुए बताया कि भारत के पास थोरियम (Thorium) के विशाल और समृद्ध भंडार मौजूद हैं। देश को ऊर्जा और संसाधनों के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमें इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाने की दिशा में तेजी से काम करना चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि वेदांता के सभी मुख्य बिजनेस इस समय हाई-ग्रोथ के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मैंगनीज, निकेल, फेरोक्रोम और तांबे (कॉपर) जैसे महत्वपूर्ण खनिजों में मौजूद संभावनाओं को देखकर यह साफ संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में अभी कितना कुछ किया जाना बाकी है।
‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) हमारी रगों में बसा है’
नई कंपनियों की शेयर बाजार में सफल लिस्टिंग के अवसर पर अनिल अग्रवाल ने समूह की भविष्य की विकास रणनीति में आधुनिक टेक्नोलॉजी की अहम भूमिका का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारी रगों में बसा है और हम अपनी परिचालन क्षमता व उत्पादकता बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल अपने सभी छोटे-बड़े व्यवसायों में गहराई से कर रहे हैं।” अपनी भविष्य की योजनाओं का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि रणनीति के तहत मूल होल्डिंग कंपनी ‘वेदांता रिसोर्सेज’ को भी भविष्य में दोबारा शेयर बाजार में लिस्ट किया जाएगा। समूह के सभी बिजनेस अब चौतरफा विकास के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
कबाड़ के कारोबार से $4.6 अरब के साम्राज्य तक: अनिल अग्रवाल का दिलचस्प सफर
जब भी देश में शून्य से शुरुआत कर अपने दम पर एक विशाल वैश्विक कारोबारी साम्राज्य खड़ा करने वाले दिग्गज उद्योगपतियों का जिक्र होता है, तो वेदांता के संस्थापक अनिल अग्रवाल का नाम अग्रिम पंक्ति में शामिल रहता है। बिहार के एक बेहद साधारण परिवार में जन्मे अनिल अग्रवाल ने केवल अपनी कड़ी मेहनत, दूरदर्शिता और अटूट इच्छाशक्ति के बल पर माइनिंग व मेटल बिजनेस (खनन और धातु उद्योग) का एक विशाल अंतरराष्ट्रीय साम्राज्य खड़ा किया है।
बिहार की गलियों से शुरू हुआ उनका यह व्यावसायिक सफर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से होते हुए अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र लंदन तक पहुंच गया। इस लंबे और संघर्षपूर्ण सफर के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक मुकाम हासिल किए, जिनमें से लंदन स्टॉक एक्सचेंज (London Stock Exchange) पर लिस्ट होने वाली पहली भारतीय कंपनी के रूप में वेदांता की एंट्री सबसे प्रमुख मील का पत्थर है। अगर व्यक्तिगत संपत्ति की बात करें, तो ‘फोर्ब्स बिलेनियर्स इंडेक्स’ के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, आज अनिल अग्रवाल की कुल नेटवर्थ लगभग 4.6 अरब डॉलर (38 हजार करोड़ रुपये से अधिक) है।
