मिडिल ईस्ट में जंग से दुनिया में कोहराम: कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग, ईरान की एक और समुद्री रास्ता बंद करने की धमकी से बढ़ी दहशत

मध्य पूर्व में एक बार फिर संघर्ष तेज हो गया है। ईरान, हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच बढ़े सैन्य तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। मिसाइल हमलों और बढ़ती अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जबकि कई देशों के शेयर बाजारों में दबाव देखा गया।

इजरायली हमलों के बाद ईरान की नई धमकी
इजरायली हमलों के बाद ईरान की नई धमकी

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में एक बार फिर युद्ध की लपटें उठने से वैश्विक तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान, हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच हुए ताबड़तोड़ मिसाइल हमलों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है। इस अचानक बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण सहमे दुनिया भर के शेयर बाजारों में सोमवार को भारी गिरावट (कोहराम) देखने को मिली।

ईरान और इजरायल के बीच शुरू हुई इस जंग ने दुनिया भर के देशों के सामने ऊर्जा संकट को और गहरा कर दिया है। पहले से ही ‘होर्मुज स्ट्रेट’ के बंद होने से तेल-गैस की किल्लत का सामना कर रही दुनिया को अब ईरान ने एक और डराने वाली नई चेतावनी दे डाली है। इजरायल के मिसाइल हमलों के बाद ईरान की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि अगर इजरायली हमले नहीं रुके, तो वह एक और बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बंद कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो वैश्विक तेल और गैस संकट बेहद गंभीर रूप ले सकता है।

क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल, ग्लोबल मार्केट क्रैश

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी, जिसके तुरंत बाद ईरान और इजरायल के बीच सीधी और भीषण जंग की शुरुआत हो गई। इसका सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर पड़ा। पिछले कुछ दिनों से लगातार गिर रही ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमत अचानक करीब 5 फीसदी उछलकर 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी बाजार में डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड का प्राइस भी जोरदार तेजी के साथ 95 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचा। कच्चे तेल की कीमतों में आई इस अचानक तेजी ने दुनिया भर में एक बार फिर से बेकाबू महंगाई का जोखिम बढ़ा दिया है। इस युद्ध के असर से सोमवार को जापान, दक्षिण कोरिया से लेकर हांगकांग तक के प्रमुख एशियाई शेयर बाजार धड़ाम (क्रैश) हो गए।

ईरान ने दी ‘बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट’ बंद करने की चेतावनी

इजरायल द्वारा ईरान पर की गई कड़ी जवाबी कार्रवाई और मिसाइल हमलों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार अली वेलायती ने दुनिया की चिंता बढ़ाने वाला बयान दिया है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट की तरह ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद जरूरी माने जाने वाले समुद्री रास्ते ‘बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट’ (Bab-el-Mandeb Strait) को लेकर यह कड़ी वॉर्निंग दी है। ईरान का कहना है कि अगर हमलों का दायरा बढ़ा, तो वह इस रूट को भी ब्लॉक कर देगा।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, वेलायती ने सीधे शब्दों में कहा, ‘मौजूदा हालात को देखकर दुश्मन किसी गलतफहमी में न रहे। इजरायल के पास अब केवल दो ही रास्ते बचे हैं—या तो वह अपनी बेवकूफी को तुरंत रोक दे या फिर ऐसे हालातों का सामना करने के लिए तैयार रहे जहां उसे दो सबसे अहम समुद्री रास्तों पर संतुलित और कड़ा जवाब मिल सकता है।’ ईरानी नेता का यह साफ इशारा समुद्री आवाजाही को पूरी तरह ठप करने की ओर है।

होर्मुज के बाद अब बाब-अल-मंदेब से मचेगी दहशत

अमेरिका के साथ जारी तनाव के कारण ईरान ने पहले से ही दुनिया की कुल तेल जरूरत की लगभग 20 फीसदी सप्लाई के लिए जिम्मेदार ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को बंद कर रखा है। इसके चलते भारत, पाकिस्तान, ब्रिटेन और श्रीलंका समेत दुनिया के कई देशों में तेल और गैस की किल्लत बनी हुई है। ऐसे में ‘बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट’ को बंद करने की ताजा धमकी इस संकट को और ज्यादा भयावह बना सकती है।

भौगोलिक दृष्टि से बाब-अल-मंदेब समुद्री रास्ता यमन, जिबूती और इरिट्रिया के बीच स्थित है, जो यूरोप, एशिया और अरब देशों के बीच होने वाले वैश्विक व्यापार की मुख्य लाइफलाइन है। रक्षा और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस रूट पर किसी भी तरह के व्यवधान का सीधा असर दुनिया भर की सप्लाई चेन और तेल आपूर्ति पर पड़ेगा, जिससे वैश्विक मंदी और महंगाई का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।

इन प्रमुख देशों की बढ़ सकती है मुसीबत

बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को ‘स्वेज कैनाल’ (Suez Canal) का मुख्य एंट्री पॉइंट माना जाता है। एशिया से यूरोप की ओर जाने वाले तमाम व्यापारिक और तेल के जहाज इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरते हैं, जहां से रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स ट्रांसफर किए जाते हैं। विशेष रूप से खाड़ी देशों (Gulf Countries) से निकलने वाला तेल इसी रास्ते के जरिए यूरोपीय संघ (EU) के देशों—जैसे इटली, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और ब्रिटेन तक पहुंचता है। इसके बंद होने से इन सभी बड़े देशों में ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है।

हालांकि, व्यावहारिक और कानूनी रूप से बाब-अल-मंदेब सीधे तौर पर ईरान के भौगोलिक नियंत्रण में नहीं है, लेकिन यमन के बड़े हिस्सों पर प्रभाव रखने वाले ईरान समर्थित ‘हूती विद्रोही’ इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। ये विद्रोही इस रूट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाकर या उनकी आवाजाही को बाधित करके पूरी दुनिया के लिए एक नया और गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर सकते हैं।

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