US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है। एक तरफ दोनों देश शांति समझौते और संघर्षविराम को आगे बढ़ाने पर बातचीत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लगातार सैन्य हमले भी जारी हैं। पिछले चार दिनों में चार बड़े हमलों की खबरें सामने आई हैं, जिससे साफ हो गया है कि हालात अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं हैं। कभी अमेरिका दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास इलाके पर हमला कर रहा है, तो कभी ईरान अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा कर रहा है। इसी बीच एक बड़ी जानकारी यह भी सामने आई है कि दोनों देशों के बीच 60 दिन के संघर्षविराम को लेकर एक प्रस्तावित समझौता तैयार हो चुका है और अब वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
AFP और Axios की रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत करने वाले अधिकारी 60 दिनों तक संघर्षविराम बढ़ाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई वार्ता शुरू करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर सहमत हो चुके हैं। इस प्रस्ताव के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य रखने पर सहमति बनी है। समझौते में यह भी कहा गया है कि किसी भी व्यापारिक जहाज से टैक्स नहीं लिया जाएगा और उन्हें रोका या परेशान नहीं किया जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार ईरान 30 दिनों के भीतर समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाएगा। इसके बदले अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करेगा ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार फिर सामान्य हो सके। हालांकि ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि अभी अंतिम मसौदा तैयार नहीं हुआ है और किसी भी समझौते को अंतिम तभी माना जाएगा जब ईरान की इस्लामिक सरकार आधिकारिक घोषणा करेगी।
इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि बातचीत में काफी प्रगति हुई है, लेकिन कुछ शब्दों और भाषा को लेकर दोनों पक्षों के बीच अब भी चर्चा जारी है। उन्होंने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी अंतिम मंजूरी नहीं दी है।
दूसरी तरफ सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार रात ईरान के दक्षिणी प्रांत बुशहर में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि उनकी सेना ने एक अमेरिकी विमान को मार गिराया है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि अमेरिका का कोई विमान नष्ट नहीं हुआ और उसके सभी एयर एसेट सुरक्षित हैं।
ईरानी समाचार एजेंसी मेहर ने यह भी दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट के पास चार जहाजों पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की गई। ईरान का आरोप है कि ये जहाज बिना अनुमति उसके जलक्षेत्र से गुजरने की कोशिश कर रहे थे।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि दोनों देश एक साथ बातचीत भी कर रहे हैं और सैन्य कार्रवाई भी जारी रखे हुए हैं। यही वजह है कि पूरी दुनिया की नजर अब ट्रंप के अगले फैसले पर टिकी हुई है। अगर 60 दिन वाले संघर्षविराम समझौते को मंजूरी मिल जाती है, तो मध्य पूर्व में तनाव कुछ कम हो सकता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक व्यापार फिर सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर बातचीत विफल होती है, तो यह संघर्ष एक बड़े युद्ध का रूप भी ले सकता है।
