US-China Summit: ताइवान मुद्दे पर जिनपिंग की ट्रंप को सीधी चेतावनी- ‘गलत कदम से हो सकता है सीधा टकराव’

US China Summit 2026: चीन की राजधानी बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में अमेरिका और चीन के बीच हुई अहम बैठक में सहयोग और तनाव दोनों की तस्वीर देखने को मिली। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत की शुरुआत साझेदारी और सहयोग के संदेश से की, लेकिन ताइवान का मुद्दा सामने आते ही उनका रुख बेहद सख्त नजर आया।

Xi Jinping Trump meeting
Xi Jinping Trump meeting

US China Summit 2026: बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित अमेरिका और चीन के बीच की इस उच्च स्तरीय बैठक में कूटनीतिक संतुलन और तीखे तेवरों का मिला-जुला असर देखने को मिला। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ चर्चा की शुरुआत सकारात्मक और सहयोगात्मक रुख के साथ की, लेकिन बातचीत का रुख तब पूरी तरह बदल गया जब ताइवान का संवेदनशील मुद्दा सामने आया।

चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार जिनपिंग ने ताइवान को द्विपक्षीय रिश्तों का सबसे अहम और नाजुक सवाल बताते हुए ट्रंप को कड़ी चेतावनी दी कि इस मुद्दे को सही ढंग से संभालना रिश्तों की स्थिरता के लिए अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि यदि इस मामले को गलत तरीके से संभाला गया तो यह दोनों देशों के बीच सीधे टकराव या संघर्ष की स्थिति पैदा कर सकता है, जो दुनिया के लिए खतरनाक संकेत होगा।

जिनपिंग ने अपनी बात को और कड़ा करते हुए यह साफ कर दिया कि ताइवान की आजादी की मांग और ताइवान जलडमरूमध्य में शांति का माहौल कभी एक साथ नहीं रह सकते। चीन की पुरानी और अटल नीति रही है कि वह ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान की लोकतांत्रिक सरकार खुद को स्वतंत्र मानती है।

अमेरिका द्वारा ताइवान को दिए जाने वाले हथियारों और राजनीतिक समर्थन पर चीन की नाराजगी इस बैठक में भी स्पष्ट दिखी। हालांकि, इस सख्त रुख से पहले जिनपिंग ने दोनों महाशक्तियों के बीच साझेदारी बढ़ाने की वकालत भी की। उन्होंने कहा कि दुनिया में स्थिरता लाने के लिए चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार बनकर काम करना चाहिए, ताकि वैश्विक चुनौतियों का सामना मिलकर किया जा सके।

बैठक में आर्थिक मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई जिसमें ट्रेड और टैरिफ जैसे अहम सवाल शामिल थे। जिनपिंग ने आर्थिक रिश्तों को दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद बताया और यह ऐतिहासिक संदेश दोहराया कि ट्रेड वॉर में कभी किसी की जीत नहीं होती। उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि एक दिन पहले दोनों देशों की ट्रेड टीमों के बीच हुई बातचीत सकारात्मक रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर एक अच्छा संदेश गया है। जिनपिंग का मानना है कि आपसी मतभेदों और तनाव को बराबरी के आधार पर केवल संवाद के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है।

हाल के वर्षों में चिप टेक्नोलॉजी, दक्षिण चीन सागर और व्यापारिक खींचतान के कारण दोनों देशों के बीच भारी तनाव बना रहा है। हालांकि वर्तमान में टैरिफ को लेकर कुछ अस्थायी राहत के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन ताइवान का मुद्दा अब भी दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट बना हुआ है। राष्ट्रपति जिनपिंग के ताजा बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चीन अपने क्षेत्रीय दावों और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है, भले ही वह आर्थिक मोर्चे पर सहयोग के लिए तैयार नजर आ रहा हो।

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