वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर दोबारा बड़े सैन्य हमले को लेकर इसलिए सतर्क हैं, क्योंकि ईरान की मिसाइल क्षमता अभी भी काफी हद तक बरकरार है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि लंबे संघर्ष और हजारों हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान की ज्यादातर मिसाइल साइट्स अब भी सुरक्षित हैं। इतना ही नहीं, पिछले 39 दिनों के युद्ध में जिन ठिकानों को नुकसान पहुंचा था, उनमें से कई को ईरान ने फिर से चालू कर लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास कम से कम 30 सक्रिय मिसाइल साइट्स मौजूद हैं, जो क्षेत्र में तैनात अमेरिकी नौसैनिक जहाजों के लिए खतरा बन सकती हैं।
अमेरिकी आकलन के मुताबिक ईरान अभी कम से कम दो महीने तक और युद्ध लड़ने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि यदि संघर्ष जारी रहा, तो ईरानी मिसाइलों को रोकते-रोकते अमेरिका के एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार कमजोर पड़ सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान की लगभग 90 प्रतिशत भूमिगत मिसाइल सुविधाएं आंशिक या पूरी तरह चालू हालत में हैं। अमेरिका ने बीते 39 दिनों में ईरान पर करीब 13 हजार हमले किए, लेकिन इसके बावजूद वह ईरान की कुल सैन्य क्षमता का 50 प्रतिशत भी खत्म नहीं कर सका।
ईरान के पास मोबाइल लॉन्चरों का भी बड़ा नेटवर्क मौजूद है। अमेरिकी सूत्रों के अनुसार तेहरान के पास अपने करीब 70 प्रतिशत मोबाइल लॉन्चर अभी भी सुरक्षित हैं। इसका मतलब यह है कि यदि स्थायी मिसाइल साइट्स पर हमला होता है, तो ईरान मोबाइल सिस्टम के जरिए भी जवाबी हमला कर सकता है।
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने भी अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि ईरान के पास हजारों छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें अभी भी मौजूद हैं। साथ ही वह अपने लॉन्चरों को फिर से सक्रिय करने की क्षमता रखता है। यह रिपोर्ट अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के उस बयान के विपरीत मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान का शस्त्रागार लगभग तबाह हो चुका है।
विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान के कई भूमिगत भंडारों के बाहरी हिस्से जरूर क्षतिग्रस्त हुए हैं, लेकिन अंदर रखी मिसाइलें सुरक्षित हैं। ईरान अब इन ठिकानों से मलबा हटाकर मिसाइलों को फिर से इस्तेमाल लायक बना रहा है।
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि ईरान के पास 1000 से अधिक एडवांस बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जो इजरायल तक पहुंचने में सक्षम हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह ईरान पर दबाव बनाए रखे, लेकिन बड़े युद्ध से भी बचे।
