Devbhumi Nepal Campaign: नेपाल सरकार ने अपना पहला व्यापक नीति कार्यक्रम पेश करते हुए देश को वैश्विक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना सामने रखी है। इस नई नीति के तहत सरकार “देवभूमि नेपाल” अभियान शुरू करेगी, जिसका उद्देश्य नेपाल की धार्मिक विरासत, संस्कृति और आस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है।
सोमवार को नेपाल की संसद में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने सरकार का नीति कार्यक्रम पेश किया। इसमें धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सरकार का मानना है कि नेपाल की प्राचीन परंपराएं, तीर्थस्थल और सांस्कृतिक धरोहर दुनिया भर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित कर सकती हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
नई नीति में “आध्यात्मिक तीर्थ कूटनीति” को विशेष स्थान दिया गया है। इसके तहत पशुपतिनाथ मंदिर, मुक्तिनाथ मंदिर, लुंबिनी और जनकपुरधाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित करने की योजना है। सरकार इन स्थलों को केवल धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक आकर्षण के रूप में विकसित करना चाहती है।
इसके लिए पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय के तहत एक अलग तीर्थाटन विभाग बनाने की तैयारी की जा रही है। साथ ही महाभारत क्षेत्र से लेकर मानस खंड तक बुनियादी ढांचे और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है, ताकि देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को सुगम अनुभव मिल सके।
सरकार ने इस योजना को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से भी जोड़ा है। नीति के तहत कम से कम 5,000 नए होमस्टे विकसित किए जाएंगे, जिन्हें “नेपाल होमस्टे” ब्रांड के तहत ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसका लाभ सीमांत और दलित समुदायों को रोजगार के रूप में देने की योजना है।
इसके अलावा ट्रेकिंग, पर्वतारोहण, राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और बंजी जंप जैसी एडवेंचर गतिविधियों में सुरक्षा मानकों और सुविधाओं को भी मजबूत किया जाएगा।
कुल मिलाकर नेपाल की यह नई नीति स्पष्ट संकेत देती है कि देश अब खुद को केवल हिमालय और प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि धर्म, संस्कृति और पर्यटन के संगम के जरिए वैश्विक पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
