वैश्विक संकट के बीच अश्विनी वैष्णव की अपील: विदेशी मुद्रा भंडार बचाने को नागरिक आएं आगे; IT सेक्टर में वर्क फ्रॉम होम की मांग

पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर नागरिकों और उद्यमियों से विशेष सावधानी बरतने का आग्रह किया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने चेतावनी दी है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संघर्षविराम अभी ‘बहुत दूर’ है, जिसका सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ सकता है।

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने देश की आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए नागरिकों और उद्योगों से विशेष सावधानी बरतने का आह्वान किया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संघर्षविराम की संभावनाएं फिलहाल काफी कम नजर आ रही हैं। इस स्थिति का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ सकता है, जिसे सुरक्षित रखना वर्तमान समय की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह समय बेहद अनिश्चितता भरा है और भारत को बिना किसी सीधी गलती के वैश्विक संघर्षों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने देश के नागरिकों से अपील की है कि वे अपने दैनिक जीवन और कामकाज में ऐसे छोटे-छोटे बदलाव लाएं जिनसे विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके। इसके साथ ही, उन्होंने उद्यमियों को विदेशी मुद्रा अर्जित करने के नए अवसर तलाशने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया है ताकि देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान की जा सके।

इसी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने पेट्रोलियम आयात पर भारत की भारी निर्भरता को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने भारतीय उद्यमियों को सलाह दी है कि वे इलेक्ट्रिक और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाएं ताकि कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता को कम किया जा सके। उनके अनुसार, यह कठिन समय है और युवाओं की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ को और अधिक सशक्त बनाना अनिवार्य हो गया है। नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने भी इस विचार का समर्थन करते हुए भारत को ‘पेट्रो स्टेट’ से ‘इलेक्ट्रिक स्टेट’ की ओर ले जाने का लक्ष्य रखने की बात कही है।

इस आर्थिक रणनीति के बीच आईटी सेक्टर के कर्मचारियों ने भी एक महत्वपूर्ण पहल की है। प्रधानमंत्री की ईंधन बचाने की अपील का समर्थन करते हुए आईटी कर्मचारियों के संगठन ने सरकार से मांग की है कि कंपनियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ के संबंध में एक आधिकारिक परामर्श जारी किया जाए। कर्मचारियों का तर्क है कि घर से काम करने से न केवल करोड़ों लीटर पेट्रोल-डीजल की बचत होगी, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले बोझ को भी कम किया जा सकेगा। फिलहाल कई बड़ी आईटी कंपनियां इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रही हैं ताकि संकट के इस समय में देश के संसाधनों को बचाने में अपना योगदान दे सकें।

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