US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को निकालने के लिए चलाए जा रहे ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को फिलहाल अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों देशों के बीच एक ठोस समझौता होने की संभावना बन रही है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि पाकिस्तान और अन्य देशों के आग्रह तथा अमेरिका की “सैन्य सफलता” के बाद इस अभियान को कुछ समय के लिए रोकने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि देखा जा सके कि बातचीत के जरिए अंतिम समझौता संभव है या नहीं।
हालांकि ट्रंप ने साफ कर दिया कि ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ रोकने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने दबाव कम कर दिया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी नाकेबंदी और सैन्य निगरानी पहले की तरह जारी रहेगी। यानी जहाजों को निकालने का मिशन फिलहाल थमा है, लेकिन ईरान पर रणनीतिक दबाव बरकरार रहेगा।

इसी बीच अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ समाप्त करने की भी घोषणा की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रूबियो ने कहा कि अमेरिका अब किसी नई लड़ाई की स्थिति नहीं चाहता और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देना चाहता है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन का उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना और समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखना है।
ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि तेहरान अच्छी तरह जानता है कि उसे क्या नहीं करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि हाल के संघर्ष में ईरान ने छोटी नावों और हल्के हथियारों से हमला किया था, लेकिन अमेरिकी जवाबी कार्रवाई के बाद उसकी समुद्री क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
राष्ट्रपति ट्रंप के इस ऐलान का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर तुरंत दिखा। अमेरिकी कच्चे तेल (WTI) की कीमत करीब 2.18 प्रतिशत गिरकर 100.04 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। निवेशकों को उम्मीद है कि अगर होर्मुज संकट कम होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसी कारण अमेरिका ने इलाके में अपने लड़ाकू विमान, युद्धपोत और सैनिक तैनात कर रखे हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि उसकी मौजूदगी का मकसद अपने सैनिकों की सुरक्षा के साथ-साथ व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना है।
इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रूबियो ने दावा किया कि अमेरिका ने हालिया संघर्ष में ईरान की सात नावों को नष्ट किया है और नौवहन सुरक्षा को मजबूत किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका बातचीत जारी रखेगा ताकि स्थायी युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
संयुक्त राष्ट्र में भी इस संकट को लेकर हलचल तेज हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, एक प्रस्ताव तैयार किया गया है जिसमें ईरान से जहाजों पर हमले रोकने, अवैध टोल वसूली बंद करने और समुद्र में बिछाई गई माइंस की जानकारी देने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने पर प्रतिबंध या अन्य कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत पर टिकी है। यदि समझौता होता है तो मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है, लेकिन असफलता की स्थिति में क्षेत्र फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ सकता है।
