Tamil Nadu Election Result 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में आज एक नया इतिहास रचता हुआ नजर आ रहा है। चेन्नई की प्रतिष्ठित पेरम्बूर सीट पर साउथ के सुपरस्टार और ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के संस्थापक सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) ने अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा रुझानों के अनुसार, चार राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद विजय अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और द्रमुक (DMK) के दिग्गज नेता आर.डी. शेखर से 9,038 वोटों के अंतर से आगे चल रहे हैं।
पेरम्बूर सीट पर विजय का यह प्रदर्शन चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र दशकों से द्रविड़ राजनीति का गढ़ रहा है। यहां मुकाबला सीधे तौर पर दो ‘थलापतियों’ के बीच था—एक तरफ सिनेमा के ‘थलापति’ विजय थे, तो दूसरी तरफ जमीन से जुड़े स्थानीय ‘थलापति’ कहे जाने वाले आर.डी. शेखर। शेखर न केवल दो बार के विधायक हैं, बल्कि उनकी इस क्षेत्र के मतदाताओं पर गहरी पकड़ मानी जाती रही है। हालांकि, शुरुआती रुझानों ने यह साफ कर दिया है कि पेरम्बूर की जनता ने इस बार बदलाव के लिए मतदान किया है।
द्रविड़ राजनीति के समीकरणों में बदलाव
1951 में गठित पेरम्बूर सीट पर अब तक 17 बार चुनाव हुए हैं, जिनमें मुख्य मुकाबला हमेशा DMK और AIADMK के बीच ही सिमटा रहा। लेकिन विजय की पार्टी TVK की एंट्री ने इस पारंपरिक द्विपक्षीय मुकाबले को त्रिकोणीय संघर्ष में बदल दिया। विजय की रैलियों में उमड़ी युवाओं और महिलाओं की भारी भीड़ अब वोटों में तब्दील होती दिख रही है। आलोचकों ने भले ही विजय के राजनीतिक अनुभव पर सवाल उठाए थे, लेकिन 2.22 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर विजय की बढ़त ने सभी पुराने कयासों को फिलहाल पीछे छोड़ दिया है।
किंगमेकर की ओर TVK
केवल पेरम्बूर ही नहीं, बल्कि पूरे तमिलनाडु से आ रहे रुझान TVK के लिए किसी सपने से कम नहीं हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, थलापति विजय की पार्टी राज्य की 234 सीटों में से करीब 110 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो बहुमत के आंकड़े (118) के बेहद करीब है। वहीं, सत्ताधारी DMK फिलहाल तीसरे स्थान पर खिसकती नजर आ रही है, जबकि AIADMK दूसरे स्थान पर संघर्ष कर रही है। यदि यही रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो विजय न केवल किंगमेकर बनेंगे, बल्कि मुख्यमंत्री पद की रेस में भी सबसे आगे खड़े हो सकते हैं। चेन्नई की सड़कों पर विजय के समर्थकों ने अभी से जश्न मनाना शुरू कर दिया है, जिससे साफ है कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो रही है।
