अभिषेक बनर्जी बनाम बीजेपी: “10 जन्म लेने पड़ेंगे”, फाल्टा में पूरी सीट पर दोबारा चुनाव के आदेश के बाद भड़के टीएमसी महासचिव

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले राज्य में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। चुनाव आयोग (ECI) ने दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा विधानसभा सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने का अभूतपूर्व आदेश जारी किया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच अब फाल्टा सीट राजनीतिक संघर्ष का नया केंद्र बन गई है। चुनाव आयोग ने 144-फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया है। इसके साथ ही सभी सहायक मतदान केंद्रों पर भी नए सिरे से वोट डाले जाएंगे। आयोग के निर्देशानुसार 21 मई 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक पुनर्मतदान होगा, जबकि मतगणना 24 मई को कराई जाएगी। राज्य की बाकी 293 सीटों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे, लेकिन फाल्टा सीट को इससे अलग रखा गया है।

चुनाव आयोग ने यह बड़ा फैसला 29 अप्रैल को मतदान के दौरान हुई हिंसक झड़पों और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर स्टिकर लगाए जाने की शिकायतों के बाद लिया है। आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए पूरे निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान का आदेश दिया, जिससे बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

इस फैसले के बाद बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ममता बनर्जी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि तथाकथित ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जिसे आयोग ने गंभीरता से लिया है।

वहीं टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी के आरोपों का जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उनके ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता, खासकर वे लोग जो बंगाल विरोधी राजनीति करते हैं। अभिषेक ने तीखे शब्दों में कहा कि ऐसा करने के लिए विरोधियों के 10 जन्म भी कम पड़ जाएंगे।

इतना ही नहीं, अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी नेताओं को फाल्टा सीट से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे अपना सबसे मजबूत उम्मीदवार मैदान में उतारें और जनता का फैसला देख लें।

फाल्टा विधानसभा सीट डायमंड हार्बर क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जिसे टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता है। यही वजह है कि यहां पुनर्मतदान के आदेश ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। अब पूरे राज्य की नजरें 21 मई को होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जहां मतदाता तय करेंगे कि इस राजनीतिक मुकाबले में जीत किसकी होगी।

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