ईरान को ट्रंप की चेतावनी: ‘आज वे सिर्फ बातचीत की वजह से जिंदा हैं’, जहाजों पर टोल लगाने के प्रस्ताव को नकारा

पाकिस्तान की मेजबानी में ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली ऐतिहासिक शांति वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, लेकिन इस संवाद के शुरू होने से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

ईरान को ट्रंप की चेतावनी
ईरान को ट्रंप की चेतावनी

ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में होने वाली ऐतिहासिक शांति वार्ता से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वॉशिंगटन, ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी तरह का ‘पारगमन शुल्क’ या टोल लगाने की अनुमति नहीं देगा।

“अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र पर वसूली नहीं चलेगी”

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के वार्ता के लिए रवाना होने से पहले ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और इस पर टोल लगाने का कोई भी प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा, “नहीं, हम इसकी इजाजत कभी नहीं देंगे। यह अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र है। अगर वे ऐसी कोशिश कर रहे हैं, तो हम इसे सफल नहीं होने देंगे।”

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का तीखा हमला

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरान की रणनीति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल दुनिया से जबरदस्ती वसूली (Extortion) करने के लिए करना चाहता है क्योंकि उसके पास सौदेबाजी के लिए अब कोई और रास्ता नहीं बचा है। ट्रंप ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा:

“ऐसा लगता है कि ईरानियों को यह एहसास ही नहीं है कि उनके पास दुनिया से जबरदस्ती वसूली करने के अलावा कोई और दांव नहीं बचा है। आज वे जिस एकमात्र वजह से जिंदा हैं, वह है बातचीत करना!”

मीडिया और पीआर पर भी साधा निशाना

एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने ईरान की संचार रणनीति पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि ईरानी लोग ‘फर्जी खबरों वाले मीडिया’ और ‘जनसंपर्क’ (PR) को संभालने में जंग लड़ने की तुलना में कहीं ज्यादा माहिर हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान शांति वार्ता से पहले अपनी शर्तों को वैश्विक स्तर पर मजबूती से रख रहा है।

वार्ता पर अनिश्चितता के बादल

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ने अब तक खुद को केवल इसलिए संयमित रखा है ताकि बातचीत के जरिए क्षेत्र में शांति की गुंजाइश बनी रहे। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना उनकी शीर्ष प्राथमिकता है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ईरान सहयोग नहीं करता है, तो अमेरिका “अपने तरीके” से इस जलमार्ग को जल्द ही खुलवाएगा।

इस्लामाबाद में आज होने वाली यह वार्ता मध्य पूर्व के भविष्य के लिए निर्णायक मानी जा रही है, लेकिन ट्रंप के इन सख्त बयानों ने बातचीत शुरू होने से पहले ही माहौल में भारी तनाव पैदा कर दिया है।

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