US-Iran Tension: ट्रंप की दोधारी रणनीति, एक तरफ सैन्य घेराबंदी तो दूसरी तरफ ‘बैक-चैनल’ से समझौते की तलाश

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच वॉशिंगटन की दोहरी रणनीति सामने आ रही है। एक ओर अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में मरीन कमांडोज़ की तैनाती कर सैन्य दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान और कुछ खाड़ी देशों के जरिए ईरान के साथ बैकचैनल बातचीत भी जारी है।

Donald Trump
Donald Trump

US Iran Conflict: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की रणनीति के दो अलग-अलग चेहरे सामने आ रहे हैं। व्हाइट हाउस की ताजा गतिविधियों से संकेत मिलता है कि अमेरिका एक ओर सैन्य दबाव बढ़ा रहा है, तो दूसरी ओर कूटनीतिक रास्तों से समझौते की जमीन भी तलाश रहा है। अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपने मरीन कमांडोज को तैनात कर ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना दिया है, वहीं चर्चा है कि पाकिस्तान और कुछ खाड़ी देशों की मध्यस्थता से पर्दे के पीछे बातचीत भी जारी है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने एक महत्वपूर्ण संकेत दिया है। उन्होंने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस संभावित सैन्य टकराव का आर्थिक बोझ खुद उठाने के बजाय अरब देशों पर डालने पर विचार कर रहे हैं। लेविट के अनुसार, यह विचार राष्ट्रपति के जहन में है और आने वाले समय में इस पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है, हालांकि अभी तक इस पर कोई औपचारिक मुहर नहीं लगी है।

धमकी और बातचीत का मिला-जुला संदेश

कैरोलीन लेविट ने दावा किया कि सार्वजनिक रूप से सख्त रुख अपनाने के बावजूद, ईरान निजी तौर पर बातचीत की मेज पर आने को तैयार दिख रहा है। उनके मुताबिक तेहरान के साथ ‘बैक-चैनल’ वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप का रुख अभी भी बेहद कड़ा बना हुआ है। उन्होंने ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह जल्द ही किसी ठोस समझौते की दिशा में आगे नहीं बढ़ता, तो अमेरिका उसकी तेल रिफायनरियों और डीसैलिनेशन प्लांट्स को निशाना बना सकता है। ट्रंप की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों को ‘अवास्तविक’ करार देते हुए इजरायल पर मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं।

क्षेत्रीय समीकरण और बढ़ता तनाव

दूसरी ओर, ईरान भी कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रिय है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब को ‘भाईचारे वाला देश’ बताते हुए वहां से अमेरिकी सैनिकों को हटाने की अपील की है। उनका तर्क है कि क्षेत्र में शांति के लिए विदेशी ताकतों की मौजूदगी खत्म होनी चाहिए। हालांकि, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने उन अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि वे वाशिंगटन के संपर्क में हैं। कालिबाफ का कहना है कि बातचीत की खबरें महज अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को छिपाने का एक बहाना हैं।

जमीनी हालात और मानवीय संकट

पश्चिमी एशिया में युद्ध की स्थिति जमीन पर भी गंभीर होती जा रही है। इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपना सैन्य अभियान शुरू कर दिया है, जिसे इजरायली अधिकारियों ने एक लंबी चलने वाली कार्रवाई बताया है। इस संघर्ष की आग अब अंतरराष्ट्रीय शांतिदूतों तक भी पहुंच गई है। दक्षिणी लेबनान में बीते 24 घंटों के भीतर तीन संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की मौत की खबर है, जिससे स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन मौतों के लिए कौन सा पक्ष जिम्मेदार है, लेकिन इसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

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