Rajya Sabha Election Result: राज्यसभा की 37 सीटों के लिए हुए हालिया चुनाव के नतीजों ने संसद के ऊपरी सदन की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले एनडीए ने इन चुनावों में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 22 सीटों पर जीत हासिल की है। इस बड़ी कामयाबी के साथ ही राज्यसभा में एनडीए अब स्पष्ट बहुमत के आंकड़े को पार कर चुका है, जिससे आने वाले समय में सरकार के लिए महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और संविधान संशोधन बिलों को पारित कराना बेहद आसान हो जाएगा।
इन चुनावों में एनडीए की रणनीति विशेष रूप से बिहार, ओडिशा और हरियाणा में सफल रही। बिहार की सभी 5 सीटों पर कब्जा करने के साथ-साथ पार्टी ने ओडिशा में भी अतिरिक्त सीट झटकने में कामयाबी पाई। हरियाणा में कांटे की टक्कर के बीच एक सीट एनडीए के खाते में आई, जबकि 26 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ था। विपक्ष के लिए सांत्वना की बात यह रही कि उसने कुल 15 सीटें जीतीं, जिससे कांग्रेस के पास राज्यसभा में ‘विपक्ष के नेता’ का पद सुरक्षित बना रहेगा।
सदन में बदला समीकरण और बहुमत का आंकड़ा
ताजा परिणामों के बाद राज्यसभा में एनडीए की ताकत बढ़कर 135 सीटों के पार पहुंच गई है। बीजेपी अकेले 103 सीटों के साथ सदन के सबसे बड़े दल के रूप में अपनी स्थिति पहले ही मजबूत कर चुकी थी, लेकिन अब सहयोगियों के साथ मिलकर वह बहुमत के जादुई आंकड़े को छू चुकी है। इसका सीधा असर संसद के आगामी सत्रों में देखने को मिलेगा, जहाँ सरकार को अब क्षेत्रीय दलों या निर्दलीय सदस्यों के समर्थन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हालांकि, नए सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल के बाद शुरू होगा, इसलिए ये नए आंकड़े मानसून सत्र से प्रभावी रूप से लागू होंगे।
महिला आरक्षण बिल पर सरकार की नई रणनीति
बहुमत हासिल करने के बाद सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को प्रभावी ढंग से लागू करना है। हालांकि यह कानून पहले ही बन चुका है, लेकिन सरकार की मंशा इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले बिना किसी देरी के धरातल पर उतारने की है। चर्चा है कि मौजूदा सत्र में ही एक नया संविधान संशोधन बिल लाया जा सकता है, ताकि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रियाओं के कारण इसमें देरी न हो। सूत्रों के मुताबिक, इसी सप्ताह कैबिनेट इस संबंध में बड़े फैसले ले सकती है।
राज्यसभा में इस ऐतिहासिक जीत ने केंद्र सरकार के आत्मविश्वास को और बढ़ा दिया है। अब सरकार विपक्षी दलों को भी भरोसे में लेने की कोशिश कर रही है ताकि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक सहमति बनाई जा सके। सदन में बढ़ता संख्या बल निश्चित रूप से विधायी सुधारों की गति को तेज करने में मील का पत्थर साबित होगा।
