पश्चिम एशिया की राजनीति और युद्ध के मैदान में आज एक ऐसा मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। ईरान के लंबे समय तक सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके 56 वर्षीय बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया गया है। 88 सदस्यीय ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ के इस फैसले के साथ ही ईरान की सत्ता अब नई पीढ़ी और कट्टरपंथी विचारधारा के और भी सख्त हाथों में चली गई है। मोजतबा की नियुक्ति को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का पूरा समर्थन प्राप्त है, जिसे उनके पद संभालते ही की गई भीषण सैन्य कार्रवाई से समझा जा सकता है।
मोजतबा खामेनेई के बागडोर संभालते ही सोमवार तड़के ईरान ने इजरायल और उन पड़ोसी खाड़ी देशों पर मिसाइलों की एक नई लहर से हमला बोल दिया है जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। यह हमला न केवल एक सैन्य कार्रवाई है, बल्कि वैश्विक मंच पर मोजतबा का पहला और कड़ा ‘पावर मैसेज’ भी माना जा रहा है। ईरानी सरकारी मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों में मिसाइलों पर ‘सैय्यद मोजतबा, हम आपके आदेश पर तैयार हैं’ जैसे नारे लिखे देखे गए हैं, जो देश के भीतर उनके बढ़ते प्रभाव और सैन्य वफादारी को दर्शाते हैं।
ईरान की इस जवाबी कार्रवाई ने अब कतर, सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। कतर की राजधानी दोहा के पास स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए भीषण धमाकों ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। कतर के रक्षा मंत्रालय ने एक मिसाइल को मार गिराने की पुष्टि की है, जबकि सऊदी अरब ने अपने दक्षिण-पूर्वी ‘शायबाह तेल क्षेत्र’ की ओर बढ़ रहे दो ईरानी ड्रोन्स को नष्ट किया है। तनाव की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब से अपने गैर-आपातकालीन दूतावास कर्मचारियों को तुरंत निकालने का आदेश दे दिया है। कुवैत और बहरीन में भी लगातार मिसाइल और ड्रोन इंटरसेप्शन की खबरें आ रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई है।
इस बढ़ते संघर्ष का सबसे बड़ा और तत्काल असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ‘ऑयल बम’ के रूप में फूटा है। साल 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार कच्चा तेल 114 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने जापान और दक्षिण कोरिया जैसे तेल पर निर्भर देशों के शेयर बाजारों को धराशायी कर दिया है। जहाँ दुनिया भर के बाजार इस महंगाई से डरे हुए हैं, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे एक ‘मामूली कीमत’ करार दिया है। उनका तर्क है कि ईरान के परमाणु खतरे को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए तेल की कीमतों में यह अस्थायी उछाल एक छोटी सी कुर्बानी है।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी पड़ोसी देशों को कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि उनकी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किया गया, तो अंजाम बेहद घातक होंगे। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान इस युद्ध को किस स्तर तक ले जाता है और अमेरिका का अगला रणनीतिक प्रहार क्या होगा।
