West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच भारत की कूटनीति के लिए एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय शुरू हुआ है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई ऐतिहासिक बैठक में दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘नेक्स्ट लेवल पार्टनरशिप’ पर ले जाने का साझा संकल्प लिया। इस मुलाकात ने न केवल भारत-कनाडा रिश्तों को नई मजबूती दी है, बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी एक कड़ा संदेश साझा किया है।
पश्चिम एशिया संकट और भारत की प्राथमिकता
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत हमेशा से शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि सभी अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान ‘डायलॉग और डिप्लोमेसी’ (संवाद और कूटनीति) के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। क्षेत्र में रह रहे लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत उनकी सलामती सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित देशों के साथ निरंतर संपर्क में है और मिलकर काम करना जारी रखेगा। उन्होंने वैश्विक मंच से एक बार फिर दोहराया, “हमने हमेशा शांति और स्थिरता की अपील की है।”
Addressing the joint press meet with PM Mark Carney of Canada.@MarkJCarney https://t.co/p0PVHPlw0k
— Narendra Modi (@narendramodi) March 2, 2026
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और रक्षा सहयोग
दोनों नेताओं के बीच आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ जैसे गंभीर विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। पीएम मोदी और मार्क कार्नी ने इन चुनौतियों को पूरी मानवता के लिए एक साझा खतरा करार दिया और इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट होने का आह्वान किया। रक्षा क्षेत्र में संबंधों को प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से दोनों देशों ने ‘इंडिया-कनाडा डिफेंस डायलॉग’ की स्थापना करने का बड़ा निर्णय लिया है। इस पहल के माध्यम से डिफेंस इंडस्ट्री, मिलिट्री एक्सचेंज और मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (समुद्री सुरक्षा जागरूकता) को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे दोनों देशों के सैन्य और रणनीतिक संबंध एक नए स्तर पर पहुंचेंगे।
इस मुलाकात को वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव और शांति दूत के रूप में उसकी भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है। कनाडा के साथ रक्षा और कूटनीतिक मोर्चे पर यह नई साझेदारी आने वाले समय में दक्षिण एशिया और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
