ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत से दहला उत्तर प्रदेश: लखनऊ समेत कई शहरों में भारी विरोध प्रदर्शन

लखनऊ और उत्तर प्रदेश के कई शहर इन दिनों गहरे शोक और आक्रोश के दौर से गुजर रहे हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल हमले में कथित मौत की खबर ने प्रदेश के शिया समुदाय को झकझोर कर रख दिया है।

Khamenei’s Death Sparks Intense Protests Across Lucknow and UP Cities
Khamenei’s Death Sparks Intense Protests Across Lucknow and UP Cities

लखनऊ: अमेरिका–इजरायल के कथित हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद उत्तर भारत के कई शहरों में शिया समुदाय के बीच गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। दिल्ली से लेकर कश्मीर और खास तौर पर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना को गैरकानूनी और अनैतिक बताते हुए अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की है।

सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में दिखाई दे रहा है। लखनऊ, बाराबंकी, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, अमरोहा और जौनपुर सहित कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। शिया समुदाय के प्रमुख धर्मगुरुओं ने इसे पूरी उम्मत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। मौलाना कल्बे जव्वाद ने तीन दिन के शोक का ऐलान किया है, जिसके तहत समुदाय के लोगों से अपने प्रतिष्ठान बंद रखने और शोक मनाने की अपील की गई है।

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से भी तीन दिवसीय शोक की घोषणा की गई है। बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि लोग अपने घरों पर काले झंडे लगाएंगे, काले कपड़े पहनेंगे और रोजाना मजलिस का आयोजन करेंगे। कई जगह महिलाओं और पुरुषों ने मातम कर शोक व्यक्त किया।

लखनऊ में विरोध प्रदर्शन का केंद्र पुराना शहर बना हुआ है। छोटा इमामबाड़ा और बड़ा इमामबाड़ा में देर रात तक लोगों की भीड़ जुटी रही। चौक इलाके में लगातार दूसरे दिन भी प्रदर्शन हुए और पुतला दहन की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन ने एहतियातन सुरक्षा बढ़ा दी है और कुछ प्रमुख स्थलों को अस्थायी रूप से बंद रखा गया है।

उत्तर प्रदेश में इस घटना का व्यापक असर दिखने के पीछे ऐतिहासिक और धार्मिक कारण हैं। भारत में शिया समुदाय की बड़ी आबादी उत्तर प्रदेश में निवास करती है, जिसमें लखनऊ प्रमुख केंद्र माना जाता है। अयातुल्ला अली खामेनेई न केवल ईरान के राजनीतिक प्रमुख थे, बल्कि दुनियाभर के शिया मुसलमानों के लिए एक धार्मिक मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाते थे। इसी कारण उनकी मौत को यहां गहरी व्यक्तिगत और सामुदायिक क्षति के रूप में देखा जा रहा है।

लखनऊ को ‘शिराज-ए-हिंद’ और ‘मिनी ईरान’ भी कहा जाता है। अवध के पहले नवाब नवाब सादत खान का संबंध ईरान के निशापुर से था, और उनके साथ फारसी संस्कृति, भाषा और स्थापत्य शैली यहां आई। आज भी शहर के इमामबाड़ों की वास्तुकला और मुहर्रम की परंपराओं में ईरानी प्रभाव साफ झलकता है।

ईरान के पवित्र शहर कुम में स्थित मासूमा-ए-कुम की मजार और मशहद में इमाम रज़ा की दरगाह शिया मुसलमानों के प्रमुख तीर्थस्थल हैं, जहां भारत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर वर्ष जाते हैं। धार्मिक शिक्षा, तीर्थयात्रा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के कारण उत्तर प्रदेश के शिया समुदाय का ईरान से गहरा संबंध रहा है।

फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन सतर्क है। समुदाय के धार्मिक नेताओं ने भी प्रदर्शन के दौरान संयम बरतने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। हालांकि शोक और विरोध का दौर जारी है, लेकिन हालात पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

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