तेहरान: इस्लामिक गणराज्य ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर ने पूरे विश्व, विशेषकर इस्लामिक जगत को स्तब्ध कर दिया है। ईरान के सरकारी समाचार चैनल पर जैसे ही इस दुखद समाचार का प्रसारण हुआ, पूरे देश में मातम छा गया। लाइव प्रसारण के दौरान एक समाचार एंकर अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सका और खबर पढ़ते हुए फूट-फूटकर रोने लगा, जिससे स्थिति की गंभीरता और दुख का अंदाजा लगाया जा सकता है। भारी आवाज में एंकर ने देश को सूचित किया कि ‘इस्लामिक क्रांति के सर्वोच्च नेता अब हमारे बीच नहीं रहे।’
ईरान सरकार और कैबिनेट ने इस अपूरणीय क्षति पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए देश में 7 दिनों के सार्वजनिक अवकाश और 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। यह घटना न केवल एक राजनीतिक क्षति है, बल्कि एक बड़ी पारिवारिक त्रासदी भी साबित हुई है, क्योंकि रिपोर्ट्स में खामेनेई के साथ उनकी बेटी, दामाद और पोती की मृत्यु की भी पुष्टि की गई है। तेहरान की सड़कों से लेकर सुदूर प्रांतों तक लोग सड़कों पर उतरकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं।
इस घटना के बाद ईरान में सुरक्षा व्यवस्था को उच्चतम स्तर पर रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान की ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) किसी बड़े सैन्य कदम या जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर सकती है। तेहरान की संवेदनशील जगहों पर अतिरिक्त बल तैनात कर दिए गए हैं और वैश्विक स्तर पर कई देशों ने अपने दूतावासों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए हैं।
अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के साथ ही ईरान की राजनीति और रणनीतिक दिशा अब एक अनिश्चित दौर में प्रवेश कर चुकी है। पूरी दुनिया की नजरें अब ईरान के अगले कदम और उत्तराधिकार की प्रक्रिया पर टिकी हैं। क्या यह घटना क्षेत्र में प्रतिशोध की एक नई आग को जन्म देगी या शांति का कोई मार्ग प्रशस्त होगा, यह आने वाला समय ही तय करेगा। फिलहाल, ईरान अपने सबसे शक्तिशाली स्तंभ के ढहने के दुख में डूबा हुआ है।
