मुंबई में आयोजित ‘इंडिया-फ्रांस इनोवेशन फोरम’ के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव और नवाचार (innovation) की जमकर तारीफ की। तीन दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भारतीय प्रतिभा का लोहा माना और कहा कि आज दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां भारतीय मूल के नेतृत्व में फल-फूल रही हैं।
महाराष्ट्र से लेकर ग्लोबल लीडरशिप तक का जिक्र
राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने संबोधन में अल्फाबेट, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, एडोब और पालो ऑल्टो नेटवर्क्स जैसी दिग्गज कंपनियों के भारतीय सीईओ का नाम लिया। विशेष रूप से उन्होंने फ्रेंच लग्जरी ब्रांड ‘शनेल’ (Chanel) की सीईओ का जिक्र करते हुए कहा कि वह महाराष्ट्र के कोल्हापुर से आती हैं। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि जिस राज्य में वे आज खड़े हैं, वहीं से वैश्विक लीडरशिप को दिशा मिल रही है। मैक्रों की इस सूक्ष्म जानकारी और कोल्हापुर के जिक्र ने प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के चेहरे पर मुस्कान ला दी।
स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप का नया अध्याय
मंगलवार को भारत और फ्रांस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ के स्तर तक बढ़ा दिया है। दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने का संकल्प लिया। पीएम मोदी ने इस साझेदारी को ‘ग्लोबल स्टेबिलिटी (वैश्विक स्थिरता) के लिए एक ताकत’ करार दिया।
अनिश्चितता के दौर में भारत-फ्रांस की भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि वर्तमान में दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है और ऐसे में भारत-फ्रांस की साझेदारी वैश्विक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “हम फ्रांस की विशेषज्ञता और भारत के स्केल (पैमाने) को एक साथ ला रहे हैं।” राष्ट्रपति मैक्रों ने भी इस बात पर जोर दिया कि भारत की इनोवेशन शक्ति और बड़े स्तर पर टैलेंट भविष्य की वैश्विक इंडस्ट्री को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगा।
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि यह साझेदारी न केवल रणनीतिक है, बल्कि आज के मुश्किल समय में दुनिया को स्थिरता और प्रगति की ओर ले जाने वाला एक साझा विजन है।
