चंडीगढ़: पंजाब की सियासत में रविवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब पंजाब बीजेपी के उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक अरविंद खन्ना ने पार्टी छोड़कर शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया। संगरूर में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें औपचारिक रूप से अकाली दल में शामिल कराया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में अकाली दल और बीजेपी के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं चल रही थीं।
अरविंद खन्ना 2022 में बीजेपी में शामिल हुए थे और तब से पंजाब इकाई में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे थे। वे पार्टी की कोर कमेटी और वित्त समिति के सदस्य भी रहे। इससे पहले वे कांग्रेस से भी जुड़े रहे हैं और दो बार विधायक रह चुके हैं। 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले उनका अकाली दल में जाना सियासी समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें संगरूर संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस सीट से गुरमीत सिंह मीत हेयर ने जीत दर्ज की थी। अरविंद खन्ना संगरूर और धूरी विधानसभा क्षेत्रों से विधायक रह चुके हैं, जो इसी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा हैं।
It is my pleasure to welcome senior BJP leader, two-time MLA and my friend Arvind Khanna into the Shiromani Akali Dal and appoint him as the Halka Incharge of the Sangrur Assembly constituency.
— Sukhbir Singh Badal (@officeofssbadal) February 15, 2026
Mr. Khanna has been serving Sangrur for more than two decades and has been… pic.twitter.com/L5bfW2IXQq
इससे पहले 2004 में उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन तब भी उन्हें हार मिली थी। उस चुनाव में अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखदेव सिंह ढींडसा ने उन्हें पराजित किया था।
2024 के चुनावी हलफनामे के अनुसार अरविंद खन्ना की कुल संपत्ति लगभग 27.1 करोड़ रुपये और देनदारियां 12.6 करोड़ रुपये दर्ज थीं। उन्होंने अपनी वार्षिक आय 21.8 लाख रुपये बताई थी। पंजाब में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच उनका यह कदम आने वाले चुनावी परिदृश्य पर असर डाल सकता है।
