यूपी सरकार ने बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित किया, जांच के दौरान शामली कलेक्टर ऑफिस से अटैच

Bareilly City Magistrate Alankar Agnihotri: उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारे में उस समय एक अभूतपूर्व भूचाल आ गया जब बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।

Bareilly Magistrate Suspended by UP Government, Investigated from Shamli Collector Office
Bareilly Magistrate Suspended by UP Government, Investigated from Shamli Collector Office

Bareilly City Magistrate Alankar Agnihotri: उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारे में उस समय एक अभूतपूर्व भूचाल आ गया जब बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। यह मामला केवल एक प्रशासनिक इस्तीफे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शासन और प्रशासन के बीच एक गहरी वैचारिक और व्यक्तिगत खाई के रूप में उभरकर सामने आया है। राज्य सरकार ने इस विद्रोह पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए अलंकार अग्निहोत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और उन्हें शामली के कलेक्टर कार्यालय से संबद्ध (अटैच) कर दिया गया है। इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जिम्मेदारी अब मंडलायुक्त बरेली को सौंपी गई है।

इस्तीफे के पीछे की धार्मिक और भावनात्मक पृष्ठभूमि

वर्ष 2019 बैच के प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को भेजे गए अपने सात पन्नों के विस्तृत इस्तीफे में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके आक्रोश का मुख्य केंद्र प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई कथित बदसलूकी है। उन्होंने पत्र में अत्यंत भावुक होते हुए लिखा कि मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान स्थानीय प्रशासन ने वृद्ध आचार्यों और बटुक ब्राह्मणों के साथ न केवल मारपीट की, बल्कि एक बटुक की शिखा पकड़कर उसे घसीटा गया। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से शिक्षित अग्निहोत्री ने इसे पूरी ब्राह्मण जाति और साधु-संतों की अस्मिता पर प्रहार बताया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से सरकार की विचारधारा को ‘ब्राह्मण विरोधी’ करार देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं एक संवेदनशील आत्मा को झकझोर देती हैं।

‘गणतंत्र नहीं, भ्रामतंत्र है’: सरकार पर सीधा हमला

अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा महज एक विरोध पत्र नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीतिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक तीखा प्रहार है। उन्होंने अपने पत्र के अंत में कड़ी टिप्पणी करते हुए लिखा कि केंद्र और राज्य सरकारों में अब जनतंत्र या गणतंत्र जैसी कोई व्यवस्था शेष नहीं रही है, बल्कि सब कुछ ‘भ्रामतंत्र’ में बदल चुका है। उन्होंने वर्तमान सत्ता को ‘विदेशी जनता पार्टी’ की सरकार की संज्ञा देते हुए यह आरोप लगाया कि देश अब अपनी मूल लोकतांत्रिक भावनाओं से भटक चुका है। इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए बिल को भी ‘काला कानून’ बताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया और इसे वापस लेने की मांग उठाई।

Bareilly Magistrate Suspended by UP Government, Investigated from Shamli Collector Office

बंधक बनाने के आरोप और डीएम आवास पर हाई वोल्टेज ड्रामा

सोमवार की शाम बरेली के प्रशासनिक हल्के में उस समय तनाव चरम पर पहुंच गया जब इस्तीफा देने के बाद अग्निहोत्री जिलाधिकारी अविनाश सिंह के आवास पर पहुंचे। बाहर निकलने के बाद उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाया कि उन्हें करीब 45 मिनट तक डीएम आवास के भीतर बंधक बनाकर रखा गया। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने शासन के सचिव दीपक पांडेय को फोन कर अपनी स्थिति बताई, तब कहीं जाकर उन्हें छोड़ा गया। अग्निहोत्री के अनुसार, उनके खिलाफ साजिश रची गई थी कि उन्हें रात भर बंधक रखा जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब वह डीएम के साथ वार्ता कर रहे थे, तब लखनऊ के किसी उच्चाधिकारी का फोन स्पीकर पर था, जिसने उनके लिए अत्यंत अभद्र भाषा और अपशब्दों का प्रयोग किया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सामाजिक समर्थन

इस घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को भी गरमा दिया है। समाजवादी पार्टी के नेता रविदास मेहरोत्रा ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य सरकार जानबूझकर शंकराचार्य को प्रताड़ित कर रही है और उन्हें पवित्र स्नान से रोका जाना निंदनीय है। दूसरी ओर, भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने इस इस्तीफे को राजनीतिक महत्वाकांक्षा से प्रेरित बताते हुए कहा कि कुछ लोगों को समय से पहले राजनीति की ‘बू’ आने लगती है और वे ऐसे बहाने ढूंढने लगते हैं। इस बीच, बरेली कॉलेज की कर्मचारी कल्याण सेवा समिति ने अग्निहोत्री का समर्थन किया है। समिति के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने यूजीसी कानून और शंकराचार्य के अपमान पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो वे व्यापक आंदोलन को बाध्य होंगे।

फिलहाल, अलंकार अग्निहोत्री ने अपना सरकारी आवास खाली करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और उनके समर्थक बड़ी संख्या में उनके साथ खड़े नजर आ रहे हैं। यह मामला अब केवल एक अधिकारी के निलंबन का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में नौकरशाही, धार्मिक अस्मिता और नीतिगत फैसलों के बीच छिड़े एक बड़े टकराव का प्रतीक बन गया है।

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