भारत के तेजी से उभरते स्पेस-टेक स्टार्टअप ‘गैलेक्सआई’ (GalaxEye) ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक वैश्विक मुकाम हासिल किया है। कंपनी को अपनी अत्याधुनिक सैटेलाइट इमेजिंग प्रणाली के लिए आधिकारिक रूप से अमेरिकी पेटेंट (US Patent) प्रदान किया गया है। यह पेटेंट एक ऐसी प्रणाली के लिए दिया गया है जो सैटेलाइट पर मौजूद ‘ऑप्टिकल’ (Optical) और ‘सिंथेटिक एर्पेचर रडार’ (SAR) सेंसरों को एक साथ सटीक रूप से सिंक्रनाइज (Synchronize) करती है। इस तकनीक की मदद से अब एक ही समय और एक ही स्थान की उच्च-गुणवत्ता वाली रडार और ऑप्टिकल दोनों प्रकार की तस्वीरें एक साथ ली जा सकेंगी।
पारंपरिक सैटेलाइट इमेजिंग में ऑप्टिकल कैमरे केवल दिन के समय और साफ मौसम में ही उच्च-गुणवत्ता वाली तस्वीरें ले पाते हैं, जबकि घने बादलों या रात के अंधेरे में इनकी कार्यक्षमता सीमित हो जाती है। इसके विपरीत, एसएआर (SAR) तकनीक माइक्रोवेव तरंगों की मदद से 24 घंटे और बादलों के पार भी तस्वीरें खींचने में सक्षम है। गैलेक्सआई की नई पेटेंटेड तकनीक इन दोनों तकनीकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करती है। इससे अलग-अलग समय या कोण से ली गई तस्वीरों को मिलाने की जटिलता खत्म हो जाएगी और कृषि, रक्षा, आपदा प्रबंधन तथा बीमा जैसे क्षेत्रों को स्थान और समय के आधार पर सटीक और वास्तविक डेटा प्राप्त होगा।
वैश्विक बाजार में commercial सैटेलाइट इमेजिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है। ‘स्काईक्वेस्ट टेक्नोलॉजी’ की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 6.55 अरब डॉलर का रहा यह बाजार वर्ष 2033 तक बढ़कर लगभग 20.15 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस बढ़ते अवसर को भुनाने के लिए गैलेक्सआई ने अब तक 21 मिलियन डॉलर (लगभग 2.1 करोड़ डॉलर) की फंडिंग जुटाई है। कंपनी ने मई 2026 में अपने ‘मिशन दृष्टि’ के माध्यम से इस ‘OptiSAR’ तकनीक का सफल परीक्षण अंतरिक्ष में किया था और अब आगामी पांच वर्षों में 30 उपग्रहों का एक विशाल समूह (Constellation) स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है।
अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करने के लिए गैलेक्सआई ने हाल ही में अगस्त में बेंगलुरु आधारित ‘स्टारऑप्स’ (StarOps) कंपनी का अधिग्रहण किया है। इससे कंपनी को सैटेलाइट निर्माण और इन-हाउस सिस्टम विकास में बड़ी बढ़त मिलेगी। भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र (Commercial Space Sector) के अगले 10 वर्षों में 44 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें गैलेक्सआई जैसी घरेलू स्पेस-टेक कंपनियों की यह तकनीक भारत की वैश्विक दावेदारी को और मजबूत करेगी।
